आवारा जानवरों के मामले में हाई कोर्ट सख्त, मवेशियों की तस्करी व पुर्नवास मामले में पूर्व आदेश पर मांगी कम्पलाईज रिपोर्ट

चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को निर्धारित की है।

जबलपुर, संदीप कुमार। मप्र हाई कोर्ट (MP High Court) में मवेशियों की तस्करी व पशुवध रोकने और गौशाला स्थापित व उनकी दुर्दशा संबंधी मामलों को काफी गंभीरता से लिया गया है, शहर की सड़कों पर घूम रहे मवेशियों व हाइवे पर हो रहीं मौतों पर चिंता जाहिर करते हुए न्यायालय (Court) ने पूर्व में सरकार द्धारा पेश की गई पुर्नवास व अन्य कार्रवाई संबंधी पॉलिसी पर कम्पलाईज रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये है । चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को निर्धारित की है।

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गौरतलब है कि यह जनहित का मामला जबलपुर (Jabalpur) के गोकलपुर निवासी व्यवसायी ब्रजेन्द्र लक्ष्मी यादव की ओर से दायर किया गया है, जिसमें कहा गया था कि 12 नवम्बर 2019 को उन्होंने दो हजार मवेशियों वो दमोह जिले के तेन्दूखेड़ा गांव से गुजरते हुए देखा, कई मवेशियों के पैरों से खून रिस रहा था,आरोप यह भी है कि ये सभी मवेशी स्लाटर के लिए नागपुर के रास्ते हैदराबाद भेजे जा रहे थे,पशुओं के साथ आरोपित तौर पर की जा रही क्रूरता की शिकायत किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर यह याचिका दायर की गई थी, वहीं दूसरा मामला पूर्णिमा शर्मा की ओर से वर्ष 2018 में हाईकोर्ट को लिखे गये पत्र के रूप में दायर हुआ था। जिसकी जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की जा रहीं है,कहा गया था कि कांजीहाउस व गौशाला में जिन जानवरों को रखा जाता है, वहां पर्याप्त जगह नहीं है, इतना ही नहीं अधिकांश जगह सीमेंटीकरण है। इसके अलावा न तो उनके खाने-पीने की उचित व्यवस्था है और न ही उपचार की व्यवस्था।

आरोप है कि चाहे गौशाला हो या फिर सड़क पर घूमने वाले जानवरों की उचित देखभाल की व्यवस्था कोई नही है। मामले में मप्र शाासन के मुख्य सचिव, पशु विभाग के प्रमुख सचिव, जबलपुर कलेक्टर व नगर निगम आयुक्त को पक्षकार बनाया गया है,उक्त मामलों की संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कोर्ट मित्र द्धारा दिये गये सुझावों पर सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश दिये थे।

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