Jabalpur News : मनमानी के खिलाफ कड़ा एक्शन, 11 निजी स्कूल संचालकों और प्रिंसिपल के खिलाफ FIR दर्ज, वसूली गई अवैध फ़ीस करना होगी वापस

जाँच के बाद 11 स्कूलों के संचालकों और प्रिंसिपलों के खिलाफ पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई गई है , इसमें कुल 51 लोगों को आरोपी बनाया गया है जिसमें 30 स्कूल से संबंधित आरोपी हैं, 5 पुस्तक विक्रेता संबंधी आरोपी, 16 पब्लिशर संबंधित आरोपी बनाये गए है।

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Jabalpur News : निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के आदेश के बाद जबलपुर जिला कलेक्टर ने सख्त एक्शन लिया है, आदेशों के उल्लंघन की शिकायत पर जबलपुर जिला प्रशासन ने जांच के बाद 11 स्कूलों के संचालकों और प्रिंसिपलों के खिलाफ FIR दर्ज की है, कलेक्टर दीपक सक्सेना ने आदेश दिए हैं कि जिन स्कूलों ने अवैध रूप से फ़ीस वसूली है वो उन्हें वापस भी करनी होगी।

दरअसल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने नया शिक्षण सत्र शुरू होने से पहले ही अधिकारियों को आदेश दिए थे कि प्रदेश के किसी भी स्कूल में ना कॉपी-किताबें बिक सकेंगी और ना स्कूल बैग, स्कूल यूनिफ़ॉर्म, इतना ही नहीं कोई भी निजी स्कूल मनमाने तरीके से फी भी नहीं बढ़ा सकेगा बावजूद इसके जबलपुर ने सरकार के आदेश के उल्लंघन की शिकायते सामने आई।

हजारों बच्चों से वसूली करोड़ों रुपये अवैध फ़ीस 

जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने शिकायतों के बाद स्कूलों की जाँच कराई जिसमें सामने आया कि 21 हजार बच्चों 11 स्कूलों ने 81 करोड़, 30 लाख ज्यादा फीस ली गई, 7 लाख बच्चों से 240 करोड़ रुपए अवैध रूप से वसूली स्कूलों की आडिट रिपोर्ट में बड़े लेबल पर गड़बड़ी भी सामने आई।

जाँच के बाद दर्ज हुई FIR, अब तक 20 लोग गिरफ्तार 

जाँच के बाद 11 स्कूलों के संचालकों और प्रिंसिपलों के खिलाफ पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई गई है , इसमें कुल 51 लोगों को आरोपी बनाया गया है जिसमें 30 स्कूल से संबंधित आरोपी हैं, 5 पुस्तक विक्रेता संबंधी आरोपी, 16 पब्लिशर संबंधित आरोपी बनाये गए है, ये प्रदेश में किसी कलेक्टर द्वारा की गई अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। पुलिस ने इस सम्बन्ध में धारा 420,471,472, के तहत  मामला दर्ज किया है, अभी तक इस मामले में  20 लोगों की गिरफ़्तारी भी हो चुकी है, कलेक्टर ने आदेश दिया है कि स्कूल संचालकों को वसूली गई अवैध फ़ीस वापस करनी होगी।


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Atul Saxena

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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ....पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

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