एमपी गजब है! पुलिस की मिली भगत से दुष्कर्म मामले में मेडिकल जाँच की जगह कोरोना की जांच

पुलिस ने पहले दुष्कर्म की जगह गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखी। फिर मेडिकल जांच की जगह कोरोना की जांच करवाई।

मुरैना, संजय दीक्षित। पुलिस यूं ही बदनाम नहीं है। समय-समय पर पुलिस की वर्दी को दागदार करने के ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जब देश की सेवा और जन सेवा के वादे करने वाले पुलिस वालों ने फ़र्ज़ के साथ गद्दारी की है। ताजा मामला मुरैना का है जहां पर पुलिस वालों ने रुपये-पैसे लेकर दुष्कर्म के दोषी चाचा भतीजा को बचाने के लिए मेडिकल जांच की जगह कोरोना की जांच करवा दी।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार मुरैना जिले के महुआ थाना क्षेत्र के गांव में चाचा भतीजे ने युवती के साथ दुष्कर्म किया और जब इस बात की शिकायत लेकर पीड़ित के परिजन महुआ थाने में पहुंचे तो पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर परिजनों को वहां से चलता कर दिया।

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 परिजनों का आरोप है कि महुआ थाना पुलिस ने 10000 रुपए की रिश्वत लेने के बाद अपराध दर्ज नहीं किया और दुष्कर्म करने वाले चाचा भतीजा का साथ दिया।जब पीड़ित युवती अपने परिजनों के साथ महिला सेल में डीएसपी प्रियंका मिश्रा के सामने अपने गांव गुढा गांव से पहुंची और डीएसपी को बताया कि 18 जनवरी को पड़ोस में रहने वाला मोनू उर्फ मनोज पुत्र रमेश शर्मा अपने चाचा हरिओम शर्मा के साथ मिलकर अपहरण कर ले गया ।

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पीड़िता के अनुसार सरसों के खेत में मोनू ने उसके भाई भतीजे को गोली मारने की धमकी देते हुए दुष्कर्म किया। इस दौरान उसका चाचा हरिओम भी खेत की मेड पर खड़ा होकर पहरा दे रहा था।

3 दिन तक मुरैना में एक घर में बंधक बनाकर रखा गया। जहां चाचा हरिओम ने भी दुष्कर्म किया। पीड़िता के भाई ने बताया कि महुआ थाना प्रभारी पीएस यादव के द्वारा 10000 रुपए की रिश्वत की मांग की गई थी, लेकिन रुपए कम होने के कारण 5000 रुपए दिए तो  रुपए लेने से थाना प्रभारी ने इंकार कर दिया। बाद में ₹10000 दिए जाने पर भी गुमशुदगी का मामला दर्ज किया। विधायक से शिकायत की तो थानेदार ने उनकी बहन को ढूंढकर मेडिकल कराने के लिए थाना प्रभारी को कहा लेकिन महुआ थाना पुलिस ने युवती की मेडिकल परीक्षण कराने की बजाय कोरोना की जांच करवा दी ।वही पीड़ित परिजनों का कहना है कि आरोपी राजीनामा के लिए डरा धमका रहे हैं।