रतलाम में कम पड़ी मुक्तिधाम में जगह, बाहर करना पड़ा अंतिम संस्कार

बुधवार को इस श्मशान घाट पर एक साथ इतनी लाशें आयी की अंतिम संस्कार के लिए की प्लेटफार्म छोटा पड़ गया। इसी में 1 निधन सैलाना के डीएसपी मान सिंह चौहान का भी हुआ।

मध्य प्रदेश

रतलाम, सुशील खरे। कल ही कोविड जिला प्रभारी मंत्री और प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा (Finance Minister Jagdish Deora) ने एक दिन में रतलाम मेडिकल कॉलेज (Ratlam Medical College) की व्यवस्था सुधरने का दावा किया था। जिसकी बुधवार को हवा निकल गई। कड़वा सच तो यह है पहले कोरोना का हाहाकार मचा था जो अब मौत के तांडव तक जा पहुंचा। मेडिकल कालेज से कोरोना प्रोटोकाल के साथ रवाना हुए शव से बुधवार को भक्तन की बावड़ी श्मसान आबाद रहा। बुधवार को इस श्मशान घाट पर एक साथ इतनी लाशें आयी की अंतिम संस्कार के लिए की प्लेटफार्म छोटा पड़ गया। इसी में 1 निधन सैलाना के डीएसपी मान सिंह चौहान का भी हुआ।

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मुक्तिधाम में मृतकों का अंबार लगने पर शवों का अंतिम संस्कार बाहर करना पड़ा। यह रतलाम का इतिहास बन गया कि किसी मुक्तिधाम में एक दिन में इतने अधिक शव का अंतिम संस्कार हुआ। यह सभी शव कोरोना प्रोटोकाल के तहत मेडिकल कालेज से लाये गए थे। मैदानी हक़ीक़ल तो यही है कि एक दिन में दो दर्जनो से अधिक मौत हुई, जिनका कोरोना पोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार हुआ। भक्तन की बावड़ी में एक दर्जन शवों का एक साथ अंतिम संस्कार करने की व्यवस्था है। लेकिन जब श्मशान पहुंच कर मैदानी हकीकत देखी तो दिल दहलाने वाली तस्वीरे सामने आई। जहां श्मशान में 12 शव प्लेटफॉर्म पर, उतने ही नीचे और कुछ श्मसान के बाहर अंतिम बिदाई ले रहे थे, चिताएं आग की लपटों में धधक रही थी। जिसे देख शर्मसार होती मानवता सवालों पर सवाल खड़ा कर रही थी कौन है इन मौतों का जिम्मेदार…? क्या कारण रहा इन मौत का ..? आखिर कब तक सिस्टम कृतिम आक्सीजन पर मौतों पर मौत का खेल खेलता रहेगा और जिम्मेदार मौन होकर दीवारों पर तस्वीरे लागते रहेंगे ! उन परिवारों का क्या होगा जिनके परिजनों का साया वेवक्त उठ गया, कौन जिम्मेदार सच्चाई बयां करेगा या झूठे आंकड़ो की बैसाखी पर मौतों का तांडव चलता रहेगा।

कोरोना की दूसरी लहर ने बड़ी संख्या में लोगो को काल का ग्रास बना दिया है। आज रतलाम के भक्तन की बावड़ी स्तिथ मुक्तिधाम पर 20 चिताएं जली। जबकि इस मुक्तिधाम पर बने प्लेटफार्म की कैपेसिटी केवल 12 चिता जलाने की है। बाकी शवों को प्लेटफार्म के बाहर जगह करके जलाया गया। शमशान के कर्मचारी मनोज प्रजापत के मुताबिक इस मुक्तिधाम के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि प्लेटफार्म के बाहर शवों को जलाने की जरूरत पड़ी है। यहां जलाए गए शव रतलाम के मेडिकल कालेज से लाये गए थे और सभी को कोरोना प्रोटोकाल के तहत ही अंतिम संस्कार किया गया। मृतकों के शव लाए जाने पर आज उनके परिजनों की भीड़ भी बड़ी संख्या में भक्तन की बावड़ी स्तिथ मुक्तिधाम पर लगी रही।

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