सागर, ब्रजेन्द्र रैकवार। मध्यप्रदेश (Madhyapradesh) में बीते दिनों आई बाढ़ से सोयाबीन फसल (Soybean crop) में भारी नुकसान पहुंचा है। हालात ये हो गए है कि बीज और लागत निकालना मुश्किल हो गया है। यहां तक की फसलों का सर्वे करने के लिए राजस्व अमला भी ही नही पहुंच रहा है।
खरीफ फसल सोयाबीन और उड़द में पीला मोजेक रोग लगने और अफलन होने से किसानों का भारी नुकसान हुआ है। पौधे तो खेतों में लगे हैं, लेकिन उनमें फलिया नहीं है। अब किसानों ने सोयाबीन और उड़द की फसल को अलग करने का मन बना लिया है, नुकसान से व्यथित बहुत से किसानों (Farmers) ने खेतों को खाली करने का मन बना लिया है।
सागर जिले (Sagar district) के जैसीनगर तहसील क्षेत्र के मिडवासा गांव के किसान सुरेंद्र सिंह (Farmer Surendra Singh) अपने 11 एकड़ के खेत खड़ी सोयाबीन की फसल पर बखरनी करवा दी है। किसान सुरेंद्र सिंह का कहना है कि मेरे 11 एकड़ के खेत पर सोयाबीन पर दाने नहीं आए पीला मोजेक रोग लगने से पत्तियां सूख गए हैं फलियों में दाने नहीं आए, बीज और लागत तक नहीं निकल पा रही, सोयाबीन की कटाई भी बहुत महंगी पड़ेगी, जिस वजह से पूरे खेत को अगली फसल के लिए खाली करने के लिए बखर दिया है।
किसान ने बताया कि 11 एकड़ में मैं दवाई छिड़काव सहित 1 लाख 10 हजार का खर्च आया था लेकर पूरी फसल सूख गई एक दाना भी नहीं आया और ना ही राजस्व अमला खेत पर सर्वे करने आया पटवारी को भी जानकारी देने के बाद भी किसी भी प्रकार का सर्वे नहीं किया गया और अब अगली फसल के लिए खेत भी खाली करना इसलिए पूरा खेत बखर दिया। वही इस संबंध में जैसीनगर तहसीलदार आरएल जागड़े ने इस सम्बन्ध में कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया