चित्रकूट में जुड़वां मासूमो की हत्या मामले में कोर्ट के फैसले से परिजन निराश, फांसी की सज़ा के लिए करेगे अपील

सतना,पुष्पराज सिंह बघेल। सतना जिले के चित्रकूट में हुए बहुचर्चित जुड़वां मासूम बच्चो के दोहरे हत्या कांड मामले में आज सोमवार को सतना जिला न्यायालय की सप्तम ए डी जे कोर्ट ने फैसला सुनाया है। पांच आरोपियों में से तीन को दोहरे आजीवन कारावास एवं दो आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपियों को आजीवन कारावास के फैसले को लेकर मृतक बच्चे श्रेयांश और प्रियांश के पिता ब्रजेश रावत ने कहा है कि वो अपने बेटों को न्याय नही दिला पाये।

कोर्ट ने इस हत्याकांड में शामिल पांचों आरोपियों को दोषी पाते हुए अलग अलग धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनायी है। एक सजा पूरी होने पर दूसरी सजा शुरू होगी। इस अपहरण और हत्याकांड में 6 लोग शामिल थे। जिसमें से एक आरोपी जेल में आत्महत्या कर चुका है।

गौरतलब है कि साल 2019 में 12 फरवरी को चित्रकूट में तेल कारोबारी बृजेश रावत के 6 साल के मासूम जुड़वा बेटे श्रेयांश और प्रियांश का अपहरण कर लिया गया था। अपहरण के बाद अपरहणकर्ताओं ने 1 करोड़ की फिरौती मांगी थी।पहली किश्त के 20 लाख रुपए देने के बाद भी आरोपियों ने दोनों मासूमों की हत्या कर दी थी। आरोपियों ने मासूमों के शवों को पत्थर से बांधकर यमुना नदी में फेंक दिया था।

इस घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था।सतना की जनता सड़कों पर आ गई थी।हत्याकांड की गूंज विधानसभा तक भी पहुंची थी।पुलिस ने घटना के मुख्य दोषी राजू द्विवेदी और पद्मकान्त शुक्ला समेत लकी तोमर, विक्रम जीत सिंह, बंटा और रामकेश यादव को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने पद्मकान्त, लकी तोमर, राजू को हत्या करने और विक्रमजीत सिंह व बंटा को साक्ष्य छुपाने का दोषी पाया। मामले में गिरफ्तारी के बाद रामकेश यादव ने जेल में आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने कोर्ट में 2500 पन्नों की चार्ज शीट पेश की थी। वहीं फैसला आने के बाद पिता ब्रजेश रावत ने रोते हुए कहा वो अपने बेटों को न्याय नहीं दिला पाये।लेकिन अपनी अंतिम सांस तक वह बेटों को न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगे।