सीहोर में गहराया पानी का संकट, ग्रामीणों में पनप रहा आक्रोश

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सीहोर। अनुराग शर्मा। 

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में पानी का संकट गहरा गया है। शहरी क्षेत्र में जल संकट से निपटने नपा व विधायक टैंकर से पानी सप्लाई करा रहे हैं, जो काफी नहीं हैं, वहीं नलों से 4 से 8 दिनों में पानी की सप्लाई हो रहा है, वह भी सिर्फ 15 मिनट ही पानी दे रहे हैं। इतना ही नहीं जो लोग टैंकर खरीद रहे थे, वह भी अब महंगे पड़ रहे हैं। क्योंकि अधिकतर निजी बोर अधिग्रहित कर लिए है, जिससे टैंकर संचालक दूर से पानी ला रहे है। यही कारण है कि 300 से 400 रुपए में मिलने वाला टैंकर अब 700 रुपए तक में मिल रहा है, लेकिन इससे खराब हालात ग्रामीण क्षेत्र के हैं। 

गांव में नलजल योजना व हेंडपंप दम तोड़ चुके है, जिससे गरीब परिवार मजदूरी छोड़कर सुबह से शाम तक पानी की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन गंभीर जल संकट होने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र में जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन, पीएचई सहित ग्राम पंचायतें भी ध्यान नहीं दे रही हैं। इससे ग्रामीणों में जमकर आक्रोश पनप रहा है।

जानकारी के अनुसार शहरी क्षेत्र में नगर पालिका व नगर परिषद के माध्यम से जल सप्लाई होता है, लेकिन जिन जल स्त्रोतों से पानी सप्लाई होता है, वह दम तोड़ चुके है, जिससे कई जगह 8-8 दिन में पानी सप्लाई हो रहा है, वहीं इक्का-दुक्का हेंडपंप ही चल रहे है, जिनकी सांस फूल रही है। ऐसे में शहरी क्षेत्र के लोगों जो सक्षम है, वह 500 से 700 रुपए में टैंकर से पानी खरीद रहे है, लेकिन गरीब लोगों पानी के लिए कड़ी मशक्कत करते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र की हालत सबसे अधिक खराब है। क्योंकि जिले के कुल 1034 गांवों में 8953 शासकीय हैंडपंप हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत जल स्तर गिरने से पानी देना बंद कर चुके है।

अधिकतर गांवों में यह स्थिति है कि 8-10 हेंडपपं होने के बाद भी एक भी पानी नहीं दे रहे है। इतना ही नहीं कुछ हेंडपंप सुधरने के लिए ग्रामीण गुहार लगा रहे है, लेकिन पंचायत व पीएचई इन पर ध्यान नहीं दे रही है। इसके साथ ही 284 नलजल योजनाएं है, जिनमें से 50 प्रतिशत बंद हो चुकी है। जबकि कुछ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़, तो कुछ पानी के अभाव में कभी-कभी ही नलों से पानी सप्लाई कर पा रही हैं।

यही कारण है कि क्षेत्र में 5 ब्लाक सीहोर, आष्टा, बुदनी, नसरुल्लागंज और इछावर के ग्रामीण क्षेत्रों में भीषण जल संकट की स्थिति निर्मित हो गई है। हालांकि पीएचई विभाग जल संकट से निपटने के लिए कुछ नई योजनाओं व सुधार के लिए हर बार प्रस्ताव बनाकर प्रशासन को भेजता है, लेकिन समय रहते पैसा नहीं आने से यह कागजों तक ही सिमटकर रह जाता है, वहीं समा��्य सभा की समीक्षा बैठकों में भी पीएचई विभाग कागजों में आंकड़ों की बाजीगरी करता रहता है। जिसमें कई योजना को प्रगतिरत बता दिया जाता है, तो कई में सुधार कार्य प्रस्तावित बताकर जनप्रतिनिधियों को चुप करा दिया जाता है, जिससे हर साल ग्रामीणों को भीषण जल संकट से जूझना पड़ता है।  

एमपी ब्रेकिंग संवाददाता ने ग्राम पंचायत बड़ी मुगावली एवं तोरनिया-सतोरनिया में पहुंचकर देखी जमीनी हकीकत

ग्राम पंचायत बड़ी मुगावली बनिया टेकरी के हेंडपंप से पानी आने के इंतजार में लगी भीड़ लगी रहती है तो वहीं ग्राम सतोरनिया में पानी के लिए इस तरह भटक रहे ग्रामीणों का हाल बेहाल है। 

यदि बात की जाए ग्राम पंचायत बड़ी मुगावली तो इस ग्राम पंचायत में 7 सौ से अधिक लोग रहते हैं। यहां सात हेंडपंप लगे है, जो लंबे समय से बंद है। एक हेंडपंप कभी कभार पानी दे देता है, जिससे यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंच जाते हैं, लेकिन कई बार पानी नहीं निकलने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। गांव में सपन्न लोग तो ट्रैक्टर-ट्राली व अन्य साधनों से दूर दराज से पानी ले आते है, लेकिन गरीब बस्ती बनिया टेकरी के लोगों को मजदूरी व घर के काम छोड़कर 2 से 3 किमी दूर सिर से ही पानी ढोना पड़ता है। क्योंकि इस ग्राम पंचायत में नलजल योजना भी नहीं है। ऐसे में लोग सुबह से ही पानी की तलाश में जुट जाते है। इस गांव में जनवरी माह से ही पानी की समस्या शुरू हो जाती है, जो मई-जून तक हाहाकार में तब्दील हो जात है। ग्रामीणों की मांग है कि यहां पास में एक तालाब है, जिसका गहरीकरण का मरम्मत का काम करा दिया जाए तो बहुत कुछ समस्या हल हो सकती है। हालांकि वर्तमान में जनप्रिनिधियों, प्रशासन व पंचायत से ग्रमीणों ने टैंकर से जल सप्लाई करने की मांग की है।

तो वहीँ तोरनिया-सतोरनिया गाँव में ग्रामीण सुबह से ही मजदूरी व घर के काम छोड़कर ट्रैक्टर व अन्य साधनों से पानी कि तलाश में निकल पड़ते हैं, जिन्हें सुबह से शाम तक खासी मशक्कत करनी पड़ती है। 3 से 4 किमी दूर से पानी ढोकर लाते हैं। कई बार पुराने व जर्जर कुओ में जान जोखिम में डालकर पानी का इंतजाम करते है। इतना ही नहीं यहां नलजल योजना की टंकी तो बनी है, लेकिन पाईप लाइन नहीं डल पाई है। जबकि करीब साढ़े सात लाख रुपए की पाईप लाइन के पैसे निकाले जा चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बोर में पानी भी है पर नलजल योजना शुरू नहीं की जा रही है। वहीं इन गांव के आसपास बने तालाब भी जर्जर हो चुके हैं, जिनमें सुधार नहीं हो रहा है, जिससे गांव में यह हालात बनते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नलजल योजना को शुरू कराने के साथ ही तालाब के पास बोर कराए जाएं, जिससे समस्या हल हो सके।