इंदौर, डेस्क रिपोर्ट। जहां एक तरफ इंदौर शहर (Indore) लगातार स्वच्छता में नंबर वन आ रहा है वहीं दूसरी तरफ शहर की सड़कों पर हुए गड्ढे और बदहाल सड़क की वजह से लोग काफी ज्यादा परेशानी का सामना करते हैं। इसको लेकर हाल ही में शहर की जनता प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया है कि शहर में सीमेंट की सड़क हो या डामर की सड़क निगम के अफसर उनके निर्माण के दौरान गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखते हैं। इस वजह से बाद में सड़कों का हाल बेहाल हो जाता है।
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दरअसल, सड़कों पर जो पेचवर्क किया जाता है वो कुछ ही दिनों में ख़राब हो जाता है। साथ ही घटिया क्वालिटी के डामर का इस्तेमाल कर सड़कें बनाई जाती है जो थोड़ी सी बारिश में ही ख़राब हो जाती है। इस पर निगम के अफसर ध्यान भी नहीं देते हैं। वहीं सड़कें बनाने वाली कंपनी और ठेकेदारों पर भी कोई कार्यवाई निगम द्वारा नहीं की जाती है। जिसकी वजह से जनता को ही परेशानी का सामना करना पड़ता है। आगे यह भी बताया गया कि सड़कों पर किए जाने वाले डामरीकरण कार्य की गारंटी व वारंटी भी नहीं रहती है। दरअसल, जब स्वच्छ सर्वेक्षण होने वाला था तब फटाक से शहर की खराब सड़कों को सही कर दिया गया था।
लेकिन एक बारिश की वजह से यह सर के वापस से गड्ढों में तब्दील हो गई। इसमें किया गया पैच वर्क पूरा उखड़ गया। दरअसल बापट से एमआर-10 रोड पर गड्ढों के कारण गुजरने वाले वाहन चालकों को काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। जन प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने बताया कि नगर निगम लाखों रुपए डामर में बर्बाद कर रहा है, जबकि इसकी गुणवत्ता भी अच्छी नहीं है। उसका नतीजा यह होता है कि सड़क गड्ढों से भर जाती है। सिर्फ कुछ ही बारिश में सड़कों में गहरे गड्ढे होने लगते हैं, जिसकी वजह से काफी परेशानियों का सामना आम जनता को करना पड़ता है।