बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघिन और शावक की मौत, प्रबंधन हुआ मौन

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर यहां संदिग्ध परिस्थितियों में एक बाघिन और उसके शावक की मौत हो गई है।

उमरिया, डेस्क रिपोर्ट। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) में बाघों (The tigers) की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर यहां संदिग्ध परिस्थितियों में एक बाघिन और उसके शावक की मौत हो गई है। बाघिन और शावक के शिकार की आशंका जताई जा रही है। वहीं उसके दो शावक अब भी लापता है। बाघिन और शावक की मौत के बाद एक बार फिर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था और मॉनिटरिंग पर सवाल उठ रहे हैं।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व मे रह रही T42 (सोलो) राजबहरा वाली बाघिन के नाम से जानी जाने वाली विश्व विख्यात बाघिन और उसके एक 3 वर्षीय मेल शावक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। बाघिन और शावक के शिकार की आशंका जताई जा रही है। जबकि उसके दो शावक लापता है। प्रबंधन द्वारा छह हाथी गश्ती दलों के द्वारा इलाके की निगरानी जा रही थी। एक सप्ताह से बाघिन और उसके चार शावकों की निगरानी की जा रही थी। पूर्व में भी उसी एरिया में कई बाघों की मौत हो चुकी है। सप्ताह भर पहले ही दो नवजात मादा बाघ शावकों की मौत हुई थी, जिसका मामला भी गरमाया हुआ है। जिसके बाद आज फिर T42 बाघिन और शावक का शव मिलने से सवाल उठ रहे हैं। वहीं अब इस पूरे मामले पर पार्क प्रबंधन ने चुप्पी साध ली है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ है जब बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व में किसी भी घटना की जानकारी प्रबंधन द्वारा नही दी जाती और मामले में लीपापोती कर दी जाती है। इससे पहले भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कई बाघ काल के गाल में समा गए और पार्क प्रबंधन हमेशा सतत मानिटरिंग की दुहाई देता रहा है।

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