MP उपचुनाव 2020: “गद्दार रेट कार्ड” जारी कर बुरे फंसे दिग्विजय सिंह, ये है मामला

दिग्विजय सिंह ने कहा था कि जिन-जिन लोगों ने इन लोगों को वोट दिया था। उन्हें 35 करोड़ में से अपना हिस्सा ले लेना चाहिए और जब तक हिस्सा ना मिले। तब तक उन्हें वोट नहीं देना चाहिए।

दिग्विजय सिंह

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश(Madhya pradesh) में आगामी उपचुनाव(By election) को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई है। राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ निजी हमले और विवादित बयानबाजी का सिलसिला जारी है। इस उपचुनाव से खुद को दूर रखे हुए राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह(Digvijay singh) चुनावी मैदान में बुरे फंसते नजर आ रहे हैं। इसका कारण है उनका सोशल मीडिया(Social media) पर बागी नेताओं का “गद्दार रेट कार्ड” जारी करना।

जानकारी के मुताबिक दिग्विजय सिंह ने पिछले दिनों कांग्रेस(Congress) से बागी होकर बीजेपी(Bjp) में शामिल हुए नेताओं का “गद्दार रेट कार्ड” जारी किया था। जिसके बाद अब भाजपा के 4 नेताओं ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के खिलाफ मानहानि पेश किया है। भाजपा से उपचुनाव उम्मीदवार और मंत्री गोविंद सिंह राजपूत(Govind singh rajput), प्रद्युमन सिंह तोमर(pradyuman singh tomar), मुन्नालाल गोयल(Munna lal goyal) और महेंद्र सिंह सिसोदिया(Mahendra Singh Sisodia) ने दिग्विजय सिंह पर मानहानि के केस दर्ज कराए। इसके साथ ही साथ उनके खिलाफ 10-10 करोड़ मानहानि का परिवाद पेश किया है।

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बता दें कि पिछले दिनों राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट पर गद्दार रेट कार्ड जारी किया था। जहां उन्होंने कांग्रेस से बागी हुए 19 नेताओं पर जमकर निशाना साधा था। इसके साथ ही उन पर 35 करोड़ में बिकने का आरोप भी लगाया था। दिग्विजय सिंह ने कहा था कि जिन-जिन लोगों ने इन लोगों को वोट दिया था। उन्हें 35 करोड़ में से अपना हिस्सा ले लेना चाहिए और जब तक हिस्सा ना मिले। तब तक उन्हें वोट नहीं देना चाहिए। वहीं मामले की अगली सुनवाई विशेष न्यायाधीश प्रवेन्द्र कुमार सिंह की अदालत में 18 नंवबर की तय है।

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जिसके बाद बीजेपी ने सख्त रुख अपनाते हुए क्राइम ब्रांच(Crime branch) में दिग्विजय सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। अब इन बागी नेताओं में से चार ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ मानहानि क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की। इसके बाद दिग्विजय सिंह मुश्किल में फंसते नजर आ रहे हैं। आगे आने वाले 3 नवंबर से पूर्व मध्य प्रदेश का राजनीतिक रंग और कितने रूप बदलेगा। यह देखना दिलचस्प है।

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