भोपाल, डेस्क रिपोर्ट।  उत्तराखंड के सियासी संकट के बीच पश्चिम बंगाल भी चर्चा में आ गया है ममता बनर्जी (Mamata Banarjee) के नाम की भी चर्चा सियासी गलियारों में शुरू हो गई है। उत्तराखंड में तीरथ सिंह रावत (Tirath Singh Rawat) ने संवैधानिक संकट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री (CM) पद से इस्तीफा दे दिया और वहां नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल तीरथ सिंह रावत मुख्यमंत्री पद सँभालने के बाद विधानसभा के सदस्य नहीं थे और वर्तमान हालात में उपचुनाव होना संभव नहीं लग रहा था। लगभग ऐसे ही हालात पश्चिम बंगाल में दिखाई दे रहे हैं, ममता बनर्जी (Mamata Banarjee) के लिए भी मुश्किल हो सकती है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद पर 115 दिन रहने वाले तीरथ सिंह रावत (Tirath Singh Rawat) ने शुक्रवार को इस्तीफा (Resign) दे दे दिया।  शुक्रवार को पहले उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को इस्तीफा भेजा फिर राजयपाल बेबी रानी मौर्य को इस्तीफा सौंप दिया।  दर असल 10 मार्च 2021 को तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और नियमानुसार 10 सितम्बर  विधानसभा का सदस्य बनना था लेकिन हालात उपचुनाव वाले नहीं दिख रहे थे। इसलिए तीरथ सिंह रावत ने संवैधानिक संकट और अनुच्छेद 164 का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया।

ये कहता है अनुच्छेद 164 (4)

अनुच्छेद 164 (4) के अनुसार कोई मंत्री यदि 6 महीने तक राज्य के विधानमंडल (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य नहीं होता है तो  ख़त्म होने के बाद मंत्री का कार्यकाल भी समाप्त हो जाएगा।

 ममता बनर्जी की स्थिति भी तीरथ सिंह रावत जैसी 

उत्तराखंड के संवैधानिक संकट जैसे हालात पश्चिम बंगाल में भी बनते दिखाई दे रहे हैं।  यहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banarjee) भी अभी विधानसभा की सदस्य नहीं हैं। ममता बनर्जी (Mamata Banarjee) ने 4 मई 2021 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और नियमानुसार उन्हें 4 नवम्बर तक विधानसभा का सदस्य बन जाना चाहिए और यही संवैधानिक बाध्यता है।  लेकिन हालत उपचुनाव के दिखाई नहीं दे रहे।  क्योंकि कोरोना की वजह से केंद्रीय चुनाव आयोग ने इस समय सभी चुनाव स्थगित किये हुए हैं ।

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चुनाव प्रक्रिया कब शुरू होगी कह नहीं सकते 

मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी (Mamata Banarjee)ने भवानीपुर की सीट अपने लिए खाली करवा ली लेकिन इस सीट से वे चुनाव तभी लड़ सकेंगी जब  केंद्रीय निर्वाचन आयोग उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित करे। विधानसभ चुनाव के समय कई राजनैतिक दलों ने चुनाव आयोग पर लोगों की जान से खलेने के आरोप लगाए थे, अब आयोग पहले ये सुनिश्चित करेगा कि चुनाव से किसी की जान को खतरा नहीं है तब आगे की सोचेगा।  ऐसे में चुनाव प्रक्रिया कब शुरू होगी ये कहना मुश्किल है।  और यदि  दरमियान 6 माहिए की समय सीमा निकल गई तो ममता बनर्जी की कुर्सी पर संवैधानिक ख़तरा  आ जाएगा और उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा।

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ममता का विधान परिषद् का दांव भी पड़ा कमजोर 

हालात को समझते हुए ममता बनर्जी (Mamata Banarjee) ने विधान परिषद के गठन का रास्ता निकालने की कोशिश की और विधानसभा से इस प्रस्ताव को सर्व सम्मति से पास भी करा लिया। लेकिन विधान परिषद का गठन लोकसभा की मंजूरी के बिना संभव नहीं है।  चुनावों के दौरान और उसके बाद भी ममता बनर्जी (Mamata Banarjee) ने जिस तरह केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के साथ व्यवहार रखा हैं उससे विधान परिषद वाला रास्ता इतना आसान दिखाई नहीं देता।

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