मप्र में दिखा ‘सफेद कौवा’, लोग हैरान, दिलचस्प है रंग बदलने की कहानी

बड़वानी| क्या आपने कभी सोचा है कि कौआ भी सफेद हो सकता है। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में सफ़ेद कौवे दिखने की चर्चा है, जिसके बाद यह कौतुहल का विषष्य बना हुआ है। इसको लेकर लोग अलग अलग तरह की चर्चाएं भी कर रहे हैं| वहीं सोशल मीडिया सफ़ेद कौवे को लेकर कई तरह की बातें और फोटो वायरल हो रही है| हालाँकि यह पहला मामला नहीं है, तमिलनाडु के कोयंबटूर और प्रदेश के सतना जिले में भी इससे पहले एक सफ़ेद कौवे को देखा गया था|

बड़वानी में नर्मदा किनारे ग्राम दतवाड़ा के चंगा आश्रम में यह दुर्लभ प्रजाति का पक्षी देखा गया है| कौवे की तरह दिखने वाले इस पक्षी में असमानता सिर्फ रंग की है। ग्रामीण पक्षी को दुर्लभ सफेद कौवा बता रहे हैं। देश के कई हिस्सों में कई बार सफेद कौआ नजर आ चुका है। मध्यप्रदेश के सतना में भी पिछले साल सफेद कौआ दिखा था। उससे पहले तमिलनाडु के कोयंबटूबर में भी सफेद कौआ को देखा गया है। मान्यता है कि जैसे ब्लैक को देखना अशुभ होता है, ठीक उसके उल्ट सफेद कौआ को देखना शुभ माना जाता है।

जानकारों का कहना है कि यह कौआ रंगहीनता (ऐल्बिनिज्म) की बीमारी से ग्रसित होगा| इसका सफे द रंग एल्बीनिजम की वजह से होता है। यह प्रक्रिया सभी प्राणियों में पाई जाती है। इसे ‘अमेरिकन क्रो’ भी कहा जाता है। सफेद कौआ दुर्लभ प्रजातियों की श्रेणी में आता है और किसी कौए का रंग बाद में सफेद हो जाना आनुवंशिक बीमारी की वजह से होता है। देश में कई जगह ऐसा पक्षी देखा जा चुका है|

ऐसी है कहानी…श्राप की वजह से हुआ था काला

सफ़ेद कौवे को लेकर पौराणिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं| कौवे के सफेद से काले होने की रोचक धार्मिक मान्यताएं हैं| धार्मिक किवदंतियों के अनुसार कौआ पहले सफेद ही होता था। एक साधु ने एक सफेद कौवे को एक बार अमृत की तलाश में भेजा। साथ ही यह चेतावनी दी कि तुम्हें अमृत के बारे में सिर्फ पता करना है, उसे पीना नहीं है। उसने अपनी सहमति इस पर दे दी। उसके बाद कौआ अमृत की तलाश में निकल गया। कठिन परिश्रम के बाद कौवे को अमृत मिल गया। किन इतनी मेहनत के बाद उसे भी अमृत पीने की लालसा होने लगी. कौवे ने अमृत पी लिया और उसके बाद इसकी जानकारी साधु को दी| अमृत पीने की बात सुनकर साधु कौवे पर नाराज हो गए और उसे श्राप दिया कि वचन भंग करके उसने अपनी जिस अपवित्र चोंच से पवित्र अमृत को जूठा किया है इसलिए लोग उससे घृणा करेंगे और अशुभ मानते हुए हमेशा उसकी बुराई करेंगे| साधु ने यह श्राप देते हुए सफेद कौवे को अपने कमंडल के काले पानी में डुबो दिया जिसके बाद कौवे का रंग काला पड़ गया और तभी से कौवे का रंग काला हो गया|