Gita Updesh के अनुसार व्यक्ति को स्वयं करने चाहिए ये 4 काम, वरना लगता है पाप

आज के आर्टिकल में हम आपको भगवान श्री कृष्ण द्वारा बताए गए इंसान के वो 4 गुण बताएंगे, जिन्हें उसे स्वयं करना चाहिए। अन्यथा, आपको पाप भी लग सकता है।

Sanjucta Pandit
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Gita Updesh : श्रीमद्भगवद्गीता सनातन धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है। जिसके बारे में हम सभी बचपन से ही सुनते आ रहे हैं। इस ग्रंथ में कुल 800 अध्याय और 700 श्लोक है, जिसे संस्कृत भाषा में लिखा गया था लेकिन अब यह हिंदी, इंग्लिश, तमिल, मराठी सहित अन्य कई भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। इसे पढ़ने से मनुष्य को संपूर्ण जीवन का रहस्य पता चलता है। दरअसल, यह भगवान श्री कृष्णा और अर्जुन के बीच वह वार्तालाप का वर्णन है। जब उन्होंने कुरुक्षेत्र की भूमि में अर्जुन की दुविधा को खत्म करने के लिए दिया था। इसके बाद श्री हरि ने अपने विश्व रूप को प्रकट कर अर्जुन की मोह माया को भंग किया। जैसा कि हम सभी जानते हैं महाभारत का युद्ध धर्म और अधर्म के बीच लड़ा गया था, इसलिए पांडवों की जीत निश्चत थी। वहीं, इस ग्रंथ में कर्म योग, भक्ति योग के अलावा ज्ञान योग का भी वर्णन किया गया है। माधव ने इसमें इंसान को मोक्ष के प्रति के कई सारे मार्ग बताए हैं। उन्होंने कहा था कि इंसान को कभी भी परिणाम की चिंता किए बगैर अपने कर्म निरंतर करते रहना चाहिए। तो चलिए आज के आर्टिकल में हम आपको भगवान श्री कृष्ण द्वारा बताए गए इंसान के वो 4 गुण बताएंगे, जिन्हें उसे स्वयं करना चाहिए। अन्यथा आपको पाप भी लग सकता है। आइए जानते हैं विस्तार से…

Gita Updesh के अनुसार व्यक्ति को स्वयं करने चाहिए ये 4 काम, वरना लगता है पाप

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मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं।