Astro Tips: 9 ग्रहों की पूजन करते समय इन नियमों का रखें ध्यान, जानें कितनी परिक्रमा करने से मिलेंगे शुभ फल

नवग्रह का ज्योतिष में विशेष महत्व बताया गया है। अगर नियमों के मुताबिक उनकी परिक्रमा की जाए तो व्यक्ति के जीवन में सब कुछ अच्छा होता है।

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Astro Tips: हिंदू धर्म में हर देवी देवता के पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। इसी के साथ कुछ जरूरी नियम भी हैं जिनका पालन करने की सलाह दी जाती है। देवी देवताओं के पूजन के दौरान उनकी परिक्रमा करने का नियम भी अनादिकाल से चला आ रहा है। देवी देवताओं के साथ सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए नौ ग्रहों की पूजन का भी विधान है।

हम पूजन पाठ तो कर लेते हैं लेकिन कई बार हमें नियमों की जानकारी नहीं होती। परिक्रमा के संबंध में जानकारी न होने की वजह से हमारे किए गए सारे कामों पर पानी फिर सकता है। ज्योतिष में नवग्रह की परिक्रमा करना शुभ माना गया है। ऐसे में अगर नियमों के साथ परिक्रमा की जाती है तो व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर होता है। उसके जीवन में सुख शांति बनी रहती है और सब कुछ सकारात्मक होता है। चलिए आज हम आपको ग्रहों की परिक्रमा करने के तरीके की जानकारी देते हैं।

सूर्य

सूर्य देवता ग्रहों के राजा कहलाते हैं और उनकी पूजन हमेशा ब्रह्म मुहूर्त में जल अर्पित कर की जाती है। सूर्य देव की पूजन करने के पश्चात 11 बार परिक्रमा करना शुभ होता है। ऐसा करने से व्यक्ति को जीवन में बहुत से लाभ प्राप्त होते हैं।

चंद्रमा

चंद्रमा की पूजन अर्चन कर परिक्रमा पांच बार की जाती है। जो व्यक्ति उपाय अपना लेता है उसे चंद्र देव की कृपा की प्राप्ति होती है और कुंडली से चंद्र दोष भी दूर हो जाता है। जीवन में जो भी परेशानी चल रही है। वो इस उपाय से दूर हो जाती है।

मंगल

अगर कुंडली में मंगल की स्थिति कमजोर है तो विधि विधान से पूजन करने के बाद 12 बार परिक्रमा करनी चाहिए। ऐसा करने से मंगल ग्रह की स्थिति सुधर जाती है और मंगल दोष भी समाप्त होता है। मंगल के स्थिति सुधारने पर व्यक्ति को अच्छे परिणाम मिलना शुरू हो जाते हैं।

बुध

बुध को व्यापार और बुद्धि का प्रतीक माना गया है। अगर किसी तरह की परेशानी आ रही है तो विधि विधान से पूजन अर्चन करने के बाद 6 बार बुध की परिक्रमा करनी चाहिए। ऐसा करने से व्यापार में लाभ मिलने लगता है और जीवन की परेशानियों का अंत हो जाता है।

गुरु

अगर आपका कोई काम बार-बार रुक रहा है और मेहनत करने के बाद भी अच्छे परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो ब्रहस्पति की पूजा करना शुभ है। पूजन के पश्चात चार बार परिक्रमा करना अच्छा माना जाता है। इससे व्यक्ति को सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है।

शुक्र

शुक्र सुख, समृद्धि ऐश्वर्य और धन दौलत का प्रतीक है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य ग्रह बलवान होता है। वह हमेशा सुख सुविधाओं से भरपूर जीवन गुजारते हैं। शुक्र की तीन बार परिक्रमा करना शुभ होता है इससे सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

राहु केतु

अगर आप राहु ग्रह के प्रभाव से पीड़ित है तो आपको कई तरह की समस्या हो सकते हैं। मौसम में राहु को प्रसन्न करने के लिए चार बार परिक्रमा करें इससे दोष से मुक्ति मिल जाएगी। अगर केतु के प्रभाव से प्रभावित है तो धन और घरेलू समस्या आ सकती है। ऐसे में केतु के दो बार परिक्रमा करें जिससे भाग्य और सुख सुविधाओं में वृद्धि होगी।

शनि

शनि कर्मों का फल देने वाला ग्रह है। अगर शनि देव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो दो बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से धन, भाग्य और घरेलू सुख की प्राप्ति होती है।

डिस्क्लेमर – इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। एमपी ब्रेकिंग इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।


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Diksha Bhanupriy

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"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है।