क्यों फेंका जाता हैं बहती नदी में सिक्का? क्या सच में बदलती है किस्मत, जानें

बहती नदी में सिक्का फेंकने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। कई लोग इसे शुभ मानते हैं, तो कुछ इसे आस्था और परंपरा से जोड़ते हैं। इसके पीछे धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण भी बताए जाते हैं, जो इसे और अधिक रोचक बनाते हैं।

Hindu Dharm: आपने अक्सर कई बार देखा होगा कि लोग बहती नदी में सिक्का फेंकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है, क्या ये एक प्रकार का अन्धविश्वास रही है इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण छुपा हुआ है। अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल उठते हैं तो ये आर्टिकल आपके लिए हैं, आज हम आपको इस आर्टिकल में विस्तार से बताएंगे कि आख़िर बेहतरीन नदियों में सिक्का क्यों फेंका जाता है।

बस से यात्रा करने के दौरान एक बार मेरी मम्मी ने भी ऐसा ही किया, उन्होंने मुझे एक सिक्का दिया और कहा कि अभी कुछ देर बाद एक नदी आने वाली है उसमें यह सिक्का फेंक देना। मैंने मम्मी से सवाल किया कि आख़िर नदी में सिक्के क्यों फेंका जाता है, मम्मी ने कहा कि ऐसा करना अच्छा माना जाता है, सभी लोग ऐसा ही करते हैं? लेकिन फिर मैंने इस बारे में जाना और समझा, और वही मैं आज आपको इस आर्टिकल में बताऊँगी, की आख़िर नदियों में सिक्का फेंकने के पीछे का कारण क्या है।

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बहती नदियों में सिक्का क्यों फेंका जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बहती नदी में सिक्का फेंकना कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि एक पुरानी परंपरा है। दरअसल, इसे आस्था और विज्ञान दोनों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि नदियों को माँ का स्वरूप माना जाता है, यही कारण है कि नदियों को पूजा भी जाता है। नदियों में सिक्का डालना एक प्रकार की भेंट होती है, ऐसा करने से माल लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और सुख समृद्धि का आशीर्वाद देती है।

क्या नदी में सिक्का डालने से सूर्य ग्रह की स्थिति मज़बूत होती है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बहती नदी में सिक्का फेंकने से सूर्य ग्रह की स्थिति मज़बूत होती है। इससे परिवार को सूर्यदेव का आशीर्वाद मिलता है, जिससे तन मन अच्छा रहता है, सेहत में सुधार आता है, शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। कहा जाता है कि यह उपाय बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। ऐसा करने से मानसिक तनाव भी धीरे धीरे कम हो जाता है और चारों तरफ़ सकारात्मक महसूस होती है।

नदियों में सिक्का फेंकने के पीछे का वैज्ञानिक कारण क्या है?

अब बात करते हैं वैज्ञानिक कारण की, अगर वैज्ञानिक नज़रिए से देखा जाए तो बहती नदी में सिक्का फेंकना फ़ायदेमंद माना जाता है। राजन समय में ताँबे के सिक्के चलते थे, और ताम्बा एक ऐसा धातु है जो पानी में जाकर पानी के बैक्टीरिया और वायरस को ख़त्म करने में मदद करता है। जिससे पानी शुद्ध होता है, इसी वजह से लोग नदियों में ताँबे के सिक्के डालते हैं। हालाँकि, आज कल ताँबे के सिक्के नहीं चलते हैं बल्कि स्टील किसी के चलते हैं, लेकिन यह परंपरा इतनी पुरानी है कि लोग अभी भी इसे अपनाते आ रहे हैं।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News नहीं करता।


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Bhawna Choubey

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इस रंगीन दुनिया में खबरों का अपना अलग ही रंग होता है। यह रंग इतना चमकदार होता है कि सभी की आंखें खोल देता है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कलम में बहुत ताकत होती है। इसी ताकत को बरकरार रखने के लिए मैं हर रोज पत्रकारिता के नए-नए पहलुओं को समझती और सीखती हूं। मैंने श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन इंदौर से बीए स्नातक किया है। अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए, मैं अब DAVV यूनिवर्सिटी में इसी विषय में स्नातकोत्तर कर रही हूं। पत्रकारिता का यह सफर अभी शुरू हुआ है, लेकिन मैं इसमें आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हूं।मुझे कंटेंट राइटिंग, कॉपी राइटिंग और वॉइस ओवर का अच्छा ज्ञान है। मुझे मनोरंजन, जीवनशैली और धर्म जैसे विषयों पर लिखना अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है। यह समाज को सच दिखाने और लोगों को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मैं अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करूंगी।

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