इस समय देशभर में चैत्र नवरात्रि की धूम है। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का बड़ा महत्व है। नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। हर दिन अलग-अलग देवी को समर्पित है। ऐसे ही अष्टमी को महागौरी की पूजा की जाती है। ऐसे में भक्त कन्या पूजन का भी इंतजार करते हैं। कई भक्तों द्वारा नवमी तिथि को कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है।
अगर आप भी नवरात्रि में घटस्थापना कर चुके हैं और कन्या पूजन या अष्टमी की तिथि का इंतजार कर रहे हैं तथा अष्टमी का शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं, तो इस खबर में हम आपको अष्टमी का शुभ मुहूर्त बताने जा रहे हैं।

अष्टमी तिथि कब है और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त?
बता दें कि हिंदू पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 4 अप्रैल को रात 8:12 बजे से शुरू हो रही है। यह तिथि 5 अप्रैल को शाम 7:26 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के मुताबिक, महाष्टमी का कन्या पूजन शनिवार 5 अप्रैल को किया जा सकता है। कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक रहेगा। ऐसे में अगर आप अष्टमी के दिन कन्या पूजन करने का विचार कर रहे हैं, तो आप इस मुहूर्त में कन्या पूजन और कन्या भोज का आयोजन कर सकते हैं। महाअष्टमी बेहद शुभ दिन होता है। इस दिन कन्या भोज करने से भक्तों को माता की कृपा प्राप्त होती है।
नवमी के दिन कन्या पूजन या कन्या भोज शुभ मुहूर्त
इसके अलावा, अगर आप नवमी के दिन कन्या पूजन या कन्या भोज करने का विचार कर रहे हैं, तो आपको बता दें कि इस बार नवमी रविवार 6 अप्रैल को आ रही है। महानवमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहने वाला है। हिंदू शास्त्रों के मुताबिक, कन्या पूजन के बिना नवरात्र को अधूरा माना जाता है। इसीलिए बड़ी संख्या में भक्त अष्टमी या नवमी के दिन छोटी-छोटी कन्याओं को कन्या भोज के लिए घर पर आमंत्रित करते हैं, उनका पूजन करते हैं और फिर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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