कांग्रेस की किरकिरी, जिस मामले की जांच को लेकर ज्ञापन दिया, उस पर जांच पहले ही शुरू हो चुकी

अशोकनगर। कांग्रेस पार्टी ने आज अशोकनगर नगरपालिका में चल रहे विवाद एवं किसानों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन दिया। ज्ञापन से पूर्व कांग्रेसियों ने कलेक्ट्रेट में जमकर नारेबाजी की। कलेक्टर को ज्ञापन देने के समय स्थानीय कोंग्रेसी नेता उस समय हक्के बक्के रह गए जब ग्वालियर से आये एक बाहरी नेता देवेंद्र तोमर ने अपनी नेतागिरी चमकाने के चक्कर मे महिला कलेक्टर मंजू शर्मा से अमर्यादित एव असभ्य तरीके से बात करते हुए वर्षों पुराने भ्रष्टाचार  की शिकायत में सीधे सीधे नवागत कलेक्टर पर आरोप  लगाने शुरू कर दिए। जिस मुद्दे को लेकर यह कहा सुनी हुई उस मामले में जिला प्रशासन पहले ही जांच कमेटी का गठन कर चुकी है।

उलेखनीय है कि बीते दिनों नपा कर्मचारियों  ने नपाअध्यक्ष पति पहलवान साहू पर गाली गलौज करने एवं गलत बिल भुगतान के लिये दबाव डालने का आरोप लगा कर एक दिन की कलमबन्द हड़ताल कर दी थी। इसके बाद पहलवान साहू ने नपा अधिकारियों के भ्रष्टाचार का खुलासा करते हुए 25लाख  के फर्जी भुगतान का मामला सामने रखा था। इसी मुद्दे पर दोनों पक्ष कलेक्टर से मिले थे। इसी मुद्दे को लेकर आज कांग्रेस ने प्रशासन एवं नपा के खिलाफ नारेबाजी कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के दौरान कलेक्टर पर समझौता करने का आरोप लगाया| 

इस मुद्दे पर कलेक्टर डॉ मंजू शर्मा का कहना है जिस तरह ज्ञापन के दौरान व्यवहार हुआ वह अशोभनीय था। उन्होंने बताया कि नपा के कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधि दोनों ने अपना पक्ष रखा था। हड़ताल से जनता को परेशानी ना  हो एवं काम सुचारू चलता रहे इस बात को प्राथमिकता से लिया गया था । साथ ही शिकायतों को लेकर सीईओ जिला पंचायत के नेतृत्व में जिला कोषालय अधिकारी एवं आरईएस विभाग के कार्यपालन यंत्री की तीन सदस्यीय जांच दल 25  जून को ही गठित कर दिया गया। ज्ञापन दे रहे स्थानीय कांग्रेसियो का नेतृत्व कर रहे बाहरी नेताओ को शायद यह पता ही नही था कि जिस प्रकरण में वह जांच ना कराने एवं समझौता कराने का आरोप लगा रहे है। उनमें जांच पूर्व से ही गठित कर दी है।



कांग्रेसी भी खपा 

हर बार की तरह इस बार भी  स्थानीय नेताओं पर थोपे गए बाहरी कांग्रेस नेताओं ने इस आंदोलन को का नेतृत्व किया। बिना जिला अध्यक्ष एवं  दोनों विधायकों की गैरमौजूदगी में कलेक्टर के साथ जिस तरह इन नेताजी ने गरम लहजे में बात कि उसे ज्यादातर कांग्रेसी भी ठीक नहीं मानते ।मगर ज्यादातर लोग सिंधिया जी के डर के कारण खामोश हैं ।नाम ना छापने की शर्त पर कुछ कांग्रेसियो का कहना है कि जो भी हुआ वह सही नहीं था बेहतर तरीके से भी अपनी बात रखी जा सकती थी।

 


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