SC/ST एक्ट: कलेक्ट्रेट का घेराव करने पहुंची महिलाएं, पुलिस से बोली- हाथ मत लगाना, तुम कम हो हम ज्यादा

अशोकनगर

मध्यप्रदेश में एससी-एसटी को लेकर लोगों का विरोध दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। जगह-जगह घेराव और प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही है। मंत्री-नेताओं के बाद अब कलेक्टरों को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को एट्रोसिटी एक्ट के विरोध में बड़ी संख्या में  सवर्ण समाज की महिलाएं नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव करने पहुंची और जमकर नारेबाजी करने लगी। 

काफी देर तक जब महिलाएं शांत नही हुई तो डिप्टी कलेक्टर बाहर निकलकर आए और उन्हें जनसुनवाई में लेकर पहुंचे। लेकिन महिलाएं शांत नही हुई और कलेक्टर को ज्ञापन देने की मांग करते हुए कलेक्ट्रेट गेट पर धरने पर बैठ गई। महिलाओं के धरने पर बैठ जाने से जनसुनवाई में पहुंचे लोगों को विरोध का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी कलेक्ट्रेट पहुंच गया। SDM सहित अन्य अधिकारियों ने महिलाओं को समझाने की कोशिश और कहा कि कलेक्टर मैडम व्यस्त है औऱ चुनाव आयोग की बैठक में बैठी हुई है। इस समय वो आपसे नही मिल सकती। इस पर गुस्साई महिलाओं ने अधिकारियों को दो टूक जवाब देते हुए कहा कि अगर कलेक्टर मैडम व्यस्त है तो हम भी फ्री नही है, घर पर बच्चों और परिवार को अकेला छोड़कर आए है, ज्ञापन लेने के लिए कलेक्टर को ही आना होगा , नही तो हम यही बैठे रहेंगें।  लेकिन महिलाएं कोई भी बात मानने को तैयार नहीं हुई और हंगामा करती रही। 

इसी बीच पुलिस ने महिलाओं को हटाने की कोशिश की, जिस पर महिलाएँ भड़क उठी और पुलिसकर्मियों को कह दिया हाथ मत लगाना तुम कम हो और हम ज्यादा, इसके बाद महिला पुलिसकर्मी पीछे हट गई।करीब तीन चार घंटे चले इस हंगामे के बाद कलेक्टर डॉक्टर मंजू शर्मा बाहर आई और उन्होंने महिलाओं से बात की। महिलाओं ने अपनी समस्या सुनाते हुए उन्हें ज्ञापन के साथ चूड़ियां भेंट की और नारेबाजी करते हुए वापस लौट गई।

महिलाओं का आरोप था कि केन्द्र सरकार द्वारा जो बिल लाया गया है उसमें बिना जांच के गिरफ्तारी व जमानत का कोई प्रावधान नहीं है। जो सर्व समाज के साथ अन्याय व संवैधानिक है। इस एक्ट में संशोधन के बाद से एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग किया जाएगा। एससी एसटी एक्ट संशोधन बिल के तहत किसी व्यक्ति को सजा होने के बाद यदि वह निर्दोष साबित होता है तो उस शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने के क्या प्रावधान हैं।निर्दोष अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग यदि सजा काटता है, तो उसकी जवाबदारी किसकी होगी। क्या उसकी कोई भरपाई कर पाएगा । 

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