मप्र में एक और घोटाला, 28 सालों से फर्जी आदेश पर निकाले गए करोड़ों

भोपाल

मध्य प्रदेश में कांग्रेस आरटीआई सेल के अध्यक्ष अजय दुबे ने राज्य की बीजेपी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने आरोपों के दस्तावेज मीडिया के माध्यम से जारी किए है।दुबे का आरोप है कि बिहार के चारा घोटाला की तर्ज पर मध्यप्रदेश में बीते 28 सालों से फर्जी आदेश के आधार पर बड़ा घोटाला हो रहा है।मामला 16 जुलाई 2017 से सरकार के संज्ञान में है, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नही की गई है।उनकी मांग है कि इसकी सीबीआई जांच की जाए और इसका ऑडिट महालेखाकार से करवाया जाए।

दरअसल, अजय दुबे ने आज पीसीसी में प्रेसवार्ता कर राज्य की भाजपा सरकार पर एक के बाद एक कई आरोप लगाए है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पिछले 28 सालों से फर्जी आदेश आधार पर करोड़ों रुपये निकाले है। सरकार को जानकारी होने के बाबजूद आज भी करोडों रुपये निकाले जा रहे है।ये फर्जी आदेश सामाजिक न्याय विभाग से संबंधित है। हाल ही में शिवराज सरकार ने कर्मचारियों की  सेवानिवृत्त आयु 62 साल की है, जो कि इससे संबंधित आदेश था। इस आदेश के तहत अशासकीय विकलांग कल्याण संस्थाओं में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों एवं शिक्षकों को 62 साल पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त किया जाना था, जबकि सेवानिवृत्त होने की आयु 60 साल थी। प्रमुख सचिव अशोक शाह सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण विभाग ने इस आदेश को फर्जी करार देते हुए निरस्त करना प्रस्तावित कर दिया। जबकि फर्जी आदेश के आधार पर ट्रेजरी पिछले 28 सालों से 62 साल की सेवानिवृत्त आयु मानकर भुगतान किया जा रहा है।

दुबे का आरोप है कि तीन फरवरी 1990 में सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण संचालनालय स्तर पर फर्जी आदेश जारी हुआ था।सरकारी कोषालयों द्वारा अवैध भुगतान कर वित्तिय नियमों का उलंघन किया गया है। वही इस घोटाले की जानकारी मुख्यमंत्री शिवराज , सामाजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव और प्रमुख सचिव अशोक शाह और सामाजिक न्याय आयुक्त को 2017 में ही लग गई थी लेकिन इसके बावजूद इन्होंने मामले की कार्रवाई नही की। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।वही महालेखाकार से इसका ऑडिट करवाया जाए।