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गौर ने अपनी ही सरकार को फिर घेरा, कहा- प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट

भोपाल

इन दिनों मप्र विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के अपनी ही सरकार पर हमले भी जारी है।एक बार फिर गौर ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी ही सरकार को घेरा है। गौर ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को चौपट बताया है।गौर ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में  45654  शिक्षकों के पद खाली हैं । अखिल भारतीय सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश गणित में 29वें और भाषा में 26वें स्थान पर है। इसके बावजूद 41 हजार 340 शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर बनाकर चुनाव ड्यूटी में लगाया गया है। इससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बच्चों का भविष्य़ खराब हो रहा है।उनके इन आरोप में विपक्ष ने भी गौर का साथ दिया और सत्तापक्ष पर जमकर हमला बोला।

 प्रश्नकाल के दौरान गौर ने सवाल उठाया कि जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी, अमीन, लेखपाल, पंचायत सचिव, ग्राम स्तरीय कार्यकर्ता, बिजली बिल रीडर, डाकिया, सहायक नर्स या मिड वाइफ, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, संविदा शिक्षक, दोपहर का भोजन कार्यकर्ता, निगम कर संग्रह कर्मचारी और शहरी क्षेत्रों में लिपकीय स्टाफ को बीएलओ बनाया जा सकता है तो फिर इन्हें ड्यूटी पर क्यों नहीं लगाया जाता है।इसके लिए उन्होंने आंकड़े भी गिनाए कि कैसे एमपी में शिक्षा का स्तर बाकी राज्यों से कमजोर है।  इन्ही कारणों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है।

गौर के सवाल के जवाब में सामान्य प्रशासन मंत्री आर्य ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था चौपट नहीं हुई है। शिक्षक पढ़ाने के अलावा अवकाश के दिन यह काम करते हैं। आर्य ने कहा कि सालभर में दो-तीन बीएलओ बदल जाते हैं।ऐसे मे उनके ड्यूटी नही लगाई जा सकती। जिला निर्वाचन कार्यालयों में 86 शिक्षक संलग्न हैं।ऐसे में तभी शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है जब कोई कर्मचारी नही होता है।निर्वाचन कार्यों के लिए दूसरे विभागों से कर्मचारी भी लगाये जाते हैं। यह  कोई परमानेंट काम नही है ।

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