एमपी की 47 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जय आदिवासी युवा शक्ति, भाजपा की 32 सीटों पर पड़ेगा असर

भोपाल। मध्यप्रदेश में एक नया संगठन विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाने में लगा है। आदिवासियों की आवाज के रूप में उभरे जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने अब प्रदेश की सभी अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित 47 सीटों पर चुनाव लड़ने का इरादा कर लिया है। जय आदिवासी संगठन की ताकत कांग्रेस और बीजेपी दोनों को चुनौती दे रही है। दोनों प्रमुख दल अपनी ज़मीन खिसकती देख घबराए हुए हैं। जय आदिवासी युवा शक्ति के अध्यक्ष डॉ हीरालाल अलावा एमडी मेडिसिन हैं और एम्स में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अलावा ने कहा कि जो फंड आदिवासी क्षेत्रों के लिए जारी किया गया था उसका इस्तेमाल कहीं नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों राजनीतिक दलों ने उनसे संपर्क किया है और पार्टी की सदस्यता देने का प्रस्ताव भी दिया है। लेकिन हम किसी भी राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ेंगे। सरकार आदिवासियों के विकास का जो दावे करती है वह सब कागजों पर सीमित हैं। धरातल पर कोई भी विकासकार्य नहीं किया गया है। जल, ज़मीन, जंगल को लेकर जो मौलिक अधिकार आदिवासियों को हासिल है, उन पर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया है। अब हमारा नारा ही अबकी बार आदिवासी सरकार है. हम पूरी 47 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे।

वहीं, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा कि पार्टी का फोकस आदिवासी क्षेत्र पर है। लेकिन जयस को हम चुनौती नहीं मानते, कई कार्यकर्ता भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। आदिवासी क्षेत्रों में हमारी पार्टी की मजबूत पकड़ है। कांग्रेस ने भी जयस को चुनौती के तौर पर खारिज कर दिया है।

गौरतलब है कि प्रदेश की 47 में से 32 सीट्स बीजेपी के पास हैं। 15 पर कांग्रेस का कब्जा है। लोकसभा की 29 सीट्स में से 6 सीटें आदिवासी हैं। इनमें से 5 पर बीजेपी और 1 पर कांग्रेस है। यानी कहा जा सकता है कि बीजेपी के सिर पर जीत का सेहरा आदिवासी सीटों के दम पर बंधता रहा है। 2018 की जीत भी आदिवासियों का भरोसा हासिल किए बिना संभव नहीं है। दरअसल आदिवासी सिर्फ 47 आरक्षित सीटों पर ही नहीं बल्कि प्रदेश की 30 अन्य सीटों को भी प्रभावित करते हैं।