न एम्बुलेंस आई न डायल 100, फ़रिश्ते ने पहुंचाया अस्पताल, लेकिन नहीं बची जान

ग्वालियर। संजीदगी, इंसानियत, मानवता, मदद जैसे शब्द आमतौर पर नेताओं के भाषणों में और दूसरों पर ज्ञान थोपने वाले लोगों के मुंह से अक्सर सुनने को मिलते है, पुलिस और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग भी पीड़ित और परेशान लोगों की मदद की शपथ लेते हैं लेकिन जब जरुरत पड़ती है तो मुंह फेर लेते हैं । ग्वालियर में ऐसी ही एक घटना हुई जिसमें एक बालक की जान चली गई। 

आज भी इस दुनिया में फरिश्ते है

घटना संतोष राज अग्रवाल के परिवार के साथ घटी। उन्होंने सोशल मीडिया पर घटना की जानकारी शेयर करते हुए ना सिर्फ पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का असली चेहरा दिखाया बल्कि एक इन्सान को भी धन्यवाद दिया जो फ़रिश्ता बनकर मदद के लिए आगे आया। उन्होंने लिखा कि कल रात वे  परिवार सहित एक विवाह समारोह में शामिल होने जा रहे थे तभी अचानक सिटी सेंटर में होटल सैंट्रल पार्क के बाहर मेरे भतीजे लक्ष्य की तबीयत बिगड़ गई थी हालत गंभीर थी मेरे पास सिर्फ टू-व्हीलर था और कोई साधन नहीं था कि बच्चे को लेकर अस्पताल जा सकूं कोई आटो रिक्शा टैक्सी नहीं मिल रही थी 108 पर फोन लगाया तो वह भी नहीं आई वहां से निकल रही डायल 100 को रोकने की कोशिश की तो वह भी नहीं रुकी। बहुत सी गाड़ियों को हाथ दिया पर कोई मदद के लिए आगे नहीं बढ़ा । जब मेरा परिवार सड़क पर रो रहा था ऐसे में एक कार आकर हमारे सामने रुकी उसमें दो युवक बैठे हुए थे उन्होंने सबके रोने का कारण पूछा और जब हमने उन्हें बताया कि बच्चे की तबियत बिगड़ गई है तो उन्होंने बिना देर किए मेरे परिजनों को अपनी कार में बैठाया और गांधी रोड स्थित एक अस्पताल में लेकर गए और वहां पर डाक्टरों से कहकर तुरंत इलाज शुरू करवाया और जब तक इलाज चला वह लोग वहीँ मौजूद रहे हालांकि ईश्वर की मर्जी के आगे किसकी चली है इलाज के लिए लाने में देरी होने के कारण मेरे भतीजे को बचाया नहीं जा सका और उसका आकस्मिक निधन हो गया पर यदि शुरुआत में ही कोई साधन या मदद मिल जाती तो शायद आज मेरे घर का चिराग रोशन रहता अभी कुछ दिन पहले पुलिस विभाग ने नेकदिल इंसान के नाम से आयोजन किया था जिसमें पीड़ित की मदद करने की अपील सभी शहर वासियों से की गई थी पर कल मेरे साथ हुऐ घटनाक्रम में किसी शहर वासी तो दूर खुद पुलिस डिपार्टमेंट के कर्मचारियों ने मदद नहीं की यदि डायल 100 रुक गई होती या 108 आ गई होती या फिर किसी शहर वासी ने मदद की होती तो आज मेरे घर पर मातम नहीं होता पर जिस फरिश्ते ने इंसानियत का धर्म निभाते हुए हमारी मदद की उनका नाम दीपक शर्मा है। उन्होंने हमारी मदद की तो पहले भी लाखों लोगों की मदद की होगी मैं और मेरा परिवार दीपक शर्मा जी का सदैव आभारी रहेगा यही है सच्चे नेकदिल इंसान मुसीबत में फंसे लोगों के लिए फरिश्ते हम दिल से दीपक शर्मा जी के आभारी हैं।

एमपी ब्रेकिंग न्यूज की तरफ से हम भी दीपक शर्मा को साधुवाद देते है और ये अपेक्षा करते हैं कि आज मदद के बिना  संतोष राज अग्रवाल के परिवार का चिराग बुझ गया कल किसी और के घर का नहीं बुझना चाहिए। मददगार बनिए और दूसरों को भी प्रेरित कीजिये।

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