CORONA

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। देशभर में एक तरफ जहां कोरोना (Corona) की दूसरी लहर (Second wave) थमती नजर आ रही है। वही कोरोना के नए वेरिएंट(New Varient) के बढ़ते मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। दरअसल देश भर में कोरोना के नए Varient के कुल 6 मामले थे लेकिन अगर ताजा मामलों की जिक्र करे तो महाराष्ट्र में Delta plus वेरिएंट के 21 मरीज सामने आए हैं। जिसको लेकर अब स्वास्थ्य विभाग (health department) सतर्क हो गया है।

दरअसल बीते दिनों महाराष्ट्र में सबसे अधिक Delta plus के 21 मरीज की रिपोर्ट Positive आई है। भारत में इससे पहले 4 राज्यों में कोरोना के नए वेरिएंट डेल्टा प्लस के मरीज की पुष्टि हो चुकी है। वही Third wave के लिए सबसे घातक साबित होने वाली डेल्टा प्लस वेरिएंट्स के मरीज का मिलना भारत के लिए चुनौती बना हुआ है।

Read More: MP News: सीएम शिवराज ने देर शाम बुलाई बड़ी बैठक, हो सकता है महत्वपूर्ण फैसला

बता दें कि इस खतरनाक वैरिंट ने विश्व के कई देशों में आतंक मचाया है। कोरोना के दूसरी लहर में प्रभावित ब्रिटेन में तीसरी लहर के अब तक 75 हजार मामले सामने आ चुके हैं। वही वैज्ञानिकों ने corona के इस वेरिएंट को सबसे घातक बताया है। वैज्ञानिकों की मानें तो इस वेरिएंट पर वैक्सीन का असर बेहद कम देखा गया है।

कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट के लिए कॉकटेल वैक्सीन को सर्वोत्तम माना गया है। महाराष्ट्र में बीते दिनों रत्नागिरी, जलगांव सहित मुंबई के कई इलाकों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट मिलने से स्वास्थ विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। वहीं जिनोम सीक्वेंसिंग (genome sequencing) के जरिए इन संक्रमित के संपर्क में आए लोगों के नमूने लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए 7500 नमूने लिए गए हैं। जिनमें से 21 लोगों में कोरोना के नए वेरिएंट डेल्टा प्लस की पुष्टि हुई है। बता दे कि देश में डेल्टा प्लस वेरिएंट का पहला मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की एक महिला में पाया गया था। इसके अलावा महाराष्ट्र और केरल में भी डेल्टा प्लस वैरिएंट के मरीज सामने आ चुके हैं। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में corona के डेल्टा प्लस वेरिएंट से 4 लोगों की मौत हो चुकी है वहीं केरल में एक 4 साल के बच्चे में डेल्टा प्लस वेरिएंट का संक्रमण देखा गया है।

एक तरफ जहां वैज्ञानिक इसे सुपर स्प्रेडर करार दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अल्फा वैरिएंट के मुकाबले डेल्टा ज्यादा घातक बताया जा रहे हैं। वही डेल्टा प्लस वेरिएंट से संक्रमित होने वाले मरीजों के तेजी से गंभीर होने की बात सामने आई है। डेल्टा वेरिएंट के जरिए 2 से 3 फीसद मरीज ही गंभीर अवस्था मैं पहुंचते थे लेकिन डाटा प्लस वेरिएंट्स से तेजी से गंभीर होने वाले मरीजों की संख्या 12 से 14% आंकी गई है। यह वाइरस 3 दिन के अंदर गले से फेफड़े तक पहुंच उसे संक्रमित करता है।

ब्रिटेन के एक केस स्टडी के माने तो वैक्सीन की पहली डोज डेल्टा प्लस वेरिएंट में महज 23% सुरक्षा कवच का निर्माण करती है जबकि दोनों डोज 70 फ़ीसदी सफल सुरक्षा कवच निर्मित कर सकते हैं।