भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में विधानसभा के बजट सत्र (budget session) में मंगलवार को एक बार फिर से हंगामे की स्थिति देखने को मिली। जहां कांग्रेस (congress) के दो विधायक (MLAs) परिसर में ही धरने पर बैठ गए हैं। इतना ही नहीं विधायकों द्वारा सरकार पर 5 करोड़ रूपए घोटाले का आरोप लगाया गया है। हंगामे की स्थिति तब बनी जब सदन में बसपा विधायक रामबाई (rambai) ने पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव (PWD Minister Gopal bhargava) पर भेदभाव को भी आरोप लगाया।

दरअसल सदन शुरू होने के कुछ देर बाद ही बसपा विधायक रामबाई ने पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव पर भेदभाव का आरोप लगाए। रामबाई ने कहा कि विधानसभा में 3 सड़कों के टेंडर को निरस्त किया गया है। साथ ही किसान कर्ज माफी पर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी (kunal chaudhary) ने कहा कि किसान कर्ज माफी पर शिवराज सरकार का रवैया दोहरी प्रवृत्ति का है।

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दूसरी तरफ विधायक फुनदे लाल मार्को और कुणाल चौधरी सदन में ही धरने पर बैठ गए। एक तरफ जहां विधायक फुनदे लाल मार्को ने सरकार पर आरोप लगाया कि छात्रों को छात्रवृत्ति (Scholarship) का लाभ नहीं दिया जा रहा है। साथ ही मार्कों ने 5 करोड़ के घोटाले की बात कही है। इतना ही नहीं मार्को ने आरोप लगाया है कि पिछले 3 साल से छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है।

कांग्रेस MLA का कहना है कि शिवराज सरकार सिर्फ दिखावे के लिए एससी-एसटी के छात्रों के हित की बात करती रहती है। वही विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि शून्य काल में भी विधायकों ने इस मामले को उठाया था लेकिन बावजूद इसके इस मामले में सुनवाई नहीं की गई है।

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वही विधायक देवेंद्र वर्मा (devendra verma) द्वारा प्रदेश में खेल गतिविधि ठप होने का मामला उठाया गया। विधायक ने कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास में आने के बाद खेल गतिविधियां पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। इतना ही नहीं विधायक देवेंद्र वर्मा द्वारा सरकार से सवाल पूछे गए। जिसमें पूछा कि क्या खेल के आयोजन को बढ़ावा देने के लिए शिवराज सरकार कोई कदम उठाएगी? वही खेल विभाग का दायित्व क्या पहले की तरह पुलिस विभाग को सौंपा जाएगा?

हालांकि विधानसभा में किसान कर्ज माफी पर जमकर हंगामा हुआ जहां विपक्ष ने शिवराज सरकार पर किसान विरोधी होने के आरोप लगाए गए। साथ ही कर्जमाफी मुद्दे पर कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को जमकर घेरा। वही हंगामे के बाद प्रश्नकाल को समाप्त करना पड़ा।