नए साल में CM की अधिकारियों को नसीहत-”सोच बदलें, E-गवर्नेंस से V-गवर्नेंस पर जायें”

भोपाल।

शु्क्रवार को सीएम कमलनाथ ने अधिकारियों के साथ वन-टू-वन चर्चा की। इस दौरान सीएम ने अधिकारियों से कहा कि सोच में परिवर्तन लाये, मध्यप्रदेश की प्रोफाइल बदले और ई गवर्नेस से वी गवर्नेस पर जाए।  सरकार अब एक साल पुरानी हो गई है। प्रशासनिक तंत्र को सरकार की सोच स्पष्ट हो गई है। सभी ने सरकार को आजमा लिया है।   उन्होंने कहा कि हर सरकार और मुख्यमंत्री की अपनी दृष्टि और कार्यशैली होती है और प्रशासन तंत्र के भी अपने तौर-तरीके होते हैं। सबसे ज्यादा जरूरी हैं सोच में परिवर्तन लाना। सोच में परिवर्तन से ही मध्यप्रदेश की नई पहचान बनेगी। सरकार की सोच और प्रशासनिक तंत्र के काम करने के तरीके में अंतर नहीं होना चाहिए। 

सीएम ने दी ये नसीहत

सोच में परिवर्तन लायें, मध्यप्रदेश की प्रोफाइल बदलें।

ई-गवर्नेंस से वी-गवर्नेंस पर जायें।

सरकार की सोच और प्रशासनिक तंत्र के काम करने के तरीकों में अंतर न हो।

सरकार जवाबदेह और मित्रवत् हो।

हम समय नहीं बदल सकते लेकिन समय हमें जरूर बदल देगा इसलिए समय के साथ आगे बढ़ें।

प्रदेश में विश्वास और आत्म-विश्वास का वातावरण बने।

शासन-प्रशासन में सुधार लाना सबसे बड़ी चुनौती।

दूसरों की सफलताओं और असफलताओं से सीख लें।

हर विभाग समीक्षा प्रकोष्ठ और विजन डाक्यूमेंट बनाए।

केन्द्र सरकार में लम्बित योजनाओं को प्राथमिकता से लें।

थोड़े नुकसान के लिए बड़े फायदे की अनदेखी करना ठीक नहीं।

अन्य राज्यों में हो रहे अच्छे कामों का भी अध्ययन करें।

उद्योग क्षेत्र में अविलम्ब त्वरित स्वीकृति देने की व्यवस्था अमल में लायें।

अनुपयोगी जमीन के लोक हित में उपयोग के लिए भूमि प्रबंधन प्राधिकरण गठित होगा।

एक सप्ताह में कर्मचारी आयोग काम करना शुरू करें।

शिक्षा में गुणवत्ता सुधार प्राथमिक शालाओं से करें।

कौशल उन्नयन की सफलता का आकलन करें।

प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में आयुर्वेदिक डॉक्टर की पद-स्थापना हो।

विभागीय बजट राशि का उपयोग जनवरी, फरवरी, मार्च में करने की प्रवृत्ति से बचें।

नकली दवाई बनाने वाली दवा कम्पनियों के विरूद्ध अभियान चलेगा।

शुद्ध के लिए युद्ध करने की स्थिति बनना अपने आप में अप्रिय।

मध्यप्रदेश को शुद्धता का प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध।

प्रदेश में माफिया का अंत होगा।

सरकार माफिया को बर्दाश्त नहीं करेगी।

कानून का उल्लंघन करने वाले साधारण लोगों को माफिया की दृष्टि से न देखें।

जनजातीय समाज को उनका अधिकार देने के लिए कदम बढ़ाने होंगे।

सबूत होते हुए गरीब लोगों से रिकॉर्ड माँगना और लकीर के फकीर बने रहने की प्रवृत्ति ठीक नहीं।

कुपोषण मिटाना सर्वोच्च प्राथमिकता।

पर्यटन की संभावनाओं को साकार करें।