Blood Donate करना शरीर के लिए कितना सही और कितना गलत? जाने सच्चाई

कुछ लोग कहते हैं कि Blood donate(रक्तदान) करने से हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, वहीं कुछ का मानना है कि शारीर में कमजोरी आ जाती है। आइये जानते हैं क्या है रक्तदान (Blood donate) से जुड़े मिथक और सच्चाई।

हेल्थ, डेस्क रिपोर्ट। रक्तदान के लिए लोगों को शुरू से ही प्रेरित किया जा रहा है, क्योंकि रक्त के अभाव में न जाने कितने ही लोगों की जान चली जाती है। वहीं अगर हर इंसान अपने जीवन में रक्तदान करने का ठान ले तो कई जिंदगियां बच जाएंगी। लेकिन रक्तदान को लेकर अब भी लोगों के मन में बहुत सी भ्रांतियां हैं, जिस वजह से वह रक्तदान करने से कतराते हैं। हालाँकि रक्तदान से जुड़े कुछ मिथक प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनसे जुड़ी सच्चाई के बारे में-

इससे तकलीफ होती है

रक्तदान से केवल शारीर में सुई चुभने के समय सुई की चुभन महसूस होने का ही अहसास होता है जो कि बहुत कम समय के लिए हल्का सा होता है। blood डोनेट करते समय या थोड़ी देर बाद शरीर में थोड़ी हरारत या सिर में हल्कापन सा महसूस किया जा सकता है।

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रक्तदान में लंबा समय लगता है।

blood डोनेट करते समय केवल पंजीकरण करने और जांच में अलग-अलग समय लग सकता है। लेकिन रक्तदान में केवल 8 से 10 मिनट का समय ही लगता है। इसके बाद रक्तदान विशेषज्ञ आपकी सूचनाओं और स्वास्थ्य की जांच करते हैं। फिर जूस पिने के कुछ समय बाद आप घर जा सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में अधिक से अधिक 40 मिनट लग सकते हैं।

रक्तदान से इंफेक्शन हो सकता है।

समुचित एंटीसेप्टिक्स और डिसइंफेक्टेंट्स के साथ ब्लड स्टेराइल तकनीक से रक्त दान की प्रक्रिया होती है। blood लेने के पहले सभी सुईयाँ स्टेराइलज की जाती हैं और एक बार रक्त लेने में नई सूई ही इस्तेमाल की जाती हैं। ऐसे में इंफेक्शन की आशंका निरर्थक है।

रक्तदान से कोविड-19 संक्रमण हो का खतरा

रिसर्च से यह साबित हो चुका है कि रक्तदान या रक्त देते समय कोविड-19 का खतरा नहीं होता।

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हेमोग्लोबिन कम होना

blood donateकरवाने से पहले रक्तदाता के हेमोग्लोबिन की जांच की जाती है। यदि व्यक्ति में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) कम होता है, तो उसका blood नहीं लिया जाता।

मधुमेह के मरीज रक्तदान नहीं कर सकते

यदि रक्तदाता का ब्लड शूगर नितान्त्रित है साथ ही मुहं से हाइपोग्लाइसेमिक दवाएं लेता है तो वह रक्तदान कर सकता है। लेकिन इंसुलिन लेने वाले रक्तदान नहीं कर सकते।

हाई बीपी के मरीज़ blood donate नहीं कर सकते

यदि रक्तदाता का नियंत्रित बीपी है साथ ही नियमित रूप से दवा भी ले रहा है जिसमे 1 माह में परिवर्तन नहीं हुआ है तो वह रक्तदान कर सकता है।

साल में सिर्फ एक बार रक्तदान

blood donate करने के बाद शरीर में  खुद ब खुद रक्त बन जाता है। रक्तदान के बाद जो प्लाज्मा चला जाता है वह मात्र 24 घंटे में फिर से बन जाता है। वहीँ लाल रक्त कण को उसी स्टार पर पहुँचने में 4 से 6 सप्ताह लगते हैं। इसलिए पुरुष हर 3 माह में और महिलाएं हर 4 चार माह के अंतराल के बाद blood donate कर सकती हैं।