गृहयुद्ध के बीच फंसा अफगानिस्तान, Taliban ने ‘कंधार’ पर किया कब्जा

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। Afganistan में Taliban के बीच संघर्ष अपनी चरम पर पहुंच चुका है। दरअसल तालिबान को अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। अफगानिस्तान में जारी खूनी संघर्ष के बीच तालिबान ने शुक्रवार को एक बड़ा दावा किया है। Taliban ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने अफगानिस्तान के सबसे बड़े शहर kandhar पर कब्जा कर लिया है। मुजाहिदीन कंधार के शहीद चौक पर पहुंच चुके हैं।

इतना ही नहीं तालिबान ने शुक्रवार को दावा करने के साथ ही बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब सिर्फ राजधानी Kabul बचा हुआ है। जिसे जल्द से जल्द कब्जे में लिया जाएगा। ज्ञात हो कि काबुल के बाद कंधार ही अफगानिस्तान का सबसे बड़ा शहर है।

इस मामले में अधिकारियों ने कहा कि कंधार पर गुरुवार रात तालिबानियों ने कब्जा कर लिया और सरकारी अधिकारी  हवाई मार्ग से भागने में सफल रहे हैं। अफगानिस्तान के कंधार पर तालिबान की पकड़ मजबूत होती जा रही है और अब तालिबानियों का अगला टारगेट kabul होगा। हालांकि फिलहाल kabul  खतरे से बाहर नजर आ रहा है।

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गृहयुद्ध से जूझ रहे अफगानिस्तान के लिए बड़ा झटका है। kandhar की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1999 में इंडियन एयरलाइंस विमान आईसी 814 (IC 814) का अपहरण कर आतंकी इसे कंधार ही लेकर गए हैं।बता दें कि 1 सप्ताह के बीच में कंधार 12वीं ऐसी प्रांतीय राजधानी है, जिस पर तालिबानियों ने कब्जा किया है।तालिबानी आतंकियों के लिए कंधार सबसे अहम कब्जा माना जा रहा है।

कंधार शहर तालिबानियों के लिए इस हिसाब से भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि तालिबान के संस्थापक मुल्ला मोहम्मद उमर का जन्म भी कंधार शहर में ही हुआ था। हालांकि वर्ष 2001 में अमेरिकी सेना ने छह लाख की आबादी वाले कंधार शहर से तालिबानियों को मारकर भगा दिया था वहीं अब एक बार फिर से तालिबान ने kandhar पर कब्जा कर लिया है और यह जीत उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसी बीच अफगानिस्तान के क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज स्पिनर राशिद खान (Rashid Khan) ने विश्व के नेताओं से अपने मुल्क और वहां के करोड़ों लोगों के लिए गुहार लगाई है। राशिद खान ने बीते दिनों ट्वीट करते हुए कहा कि मेरा मुल्क संकट में है। हर दिन बच्चों और महिलाओं सहित हजारों निर्दोष मारे जा रहे हैं। घर और संपत्ति नष्ट हो रही है हजारों परिवार विस्थापित हो चुके हैं। वहीं उन्होंने विश्व के नेताओं से हाथ जोड़कर अपील की है कि उन्हें इस संकट की घड़ी में अकेला ना छोड़ा जाए।