Parenting Tips: क्या आपका बच्चा भी दिन भर देखता है मोबाइल, छिनने पर लगता है चीखने-चिल्लाने, ऐसे हैंडल करें सिचुएशन

Parenting Tips: मोबाइल छीनने पर बच्चा करता है चीख-पुकार और चीजें फेंकना? जानिए गुस्से को नियंत्रित करने का आसान तरीका। आज के डिजिटल युग में, मोबाइल फोन हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। बड़े ही नहीं, बच्चे भी कम उम्र से ही इनका इस्तेमाल करने लगते हैं।

Bhawna Choubey
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Parenting Tips: आजकल मोबाइल जीवन का हिस्सा बन गया है। मोबाइल बच्चों से लेकर बड़े तक सभी की जरूरत बन गया है। एक बार के लिए लोग बिना खाए पिए रह सकते हैं लेकिन बिना मोबाइल के रहना किसी के लिए भी संभव नहीं है। लेकिन क्या आपको लगता है कि बच्चों का मोबाइल चलाना जरूरी है? दरअसल हम इस लेख में बात कर रहे हैं 2 साल से 10 साल तक के बच्चों की। क्या आपको लगता है 2 से 10 साल तक के बच्चों का मोबाइल चलाना जरूरी है क्या इस उम्र में सच में बच्चे मोबाइल से जरूरत का काम कर रहे हैं? आजकल हर माता-पिता इसी बात को लेकर परेशान है कि उनका बच्चा दिन भर मोबाइल देखता रहता है बिल्कुल नहीं सुनता है। इतना ही नहीं जब कभी भी बच्चे से मोबाइल छीना जाता है तो वह चिल्लाने लगता है चीखने लगता है, तो ऐसे में कैसे बच्चों की मोबाइल देखने की आदत छुड़ाएं।

इस समस्या से हर माता-पिता परेशान है। इसमें कहीं ना कहीं माता-पिता की भी गलतियां है क्योंकि जब बच्चा खाना नहीं खाता है और ज्यादा रोने लगता है या जिद करने लगता है तो माता-पिता उसे शांत करने के लिए और खाना खिलाने के लिए मोबाइल दिखाने लगते हैं। ऐसे में बच्चों की मोबाइल देखने की आदत लग जाती है। आजकल बच्चों को मोबाइल देखने की आदत इतनी बुरी लग चुकी है कि बच्चे बाहर खेलना तक पसंद नहीं करते हैं उन्हें दिनभर सिर्फ मोबाइल देखना पसंद होता है। ऐसे में फिर जब बच्चों से मोबाइल छीना चाहता है तो उन्हें बहुत गुस्सा आता है और गुस्से में बच्चे चीखने चिल्लाने लगते हैं यहां तक की कई बार चीजें भी फेकने लगते हैं।

बच्चों की मोबाइल देखने की आदत को कैसे सुधारे

शांत रहें

जब कभी भी आपका बच्चा मोबाइल नहीं दे रहा है। पहले आप उसे प्यार से समझाएं। अगर नहीं सुनी तो फिर आप उस मोबाइल ले सकते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखी कि जब आप ऐसा करेंगे तो बच्चे को गुस्सा बहुत आएगा। जब आपका बच्चा गुस्सा हो, तो सबसे पहले खुद को शांत रखना ज़रूरी है। यदि आप भी चिल्लाने लगेंगे, तो स्थिति और भी खराब हो सकती है। धीरे और शांत आवाज में उनसे बात करें। आप थोड़ी देर शांत रहे उससे प्यार से बातें करें वह अपने आप ठीक हो जाएगा।

2. उनकी भावनाओं को समझें

यह समझने की कोशिश करें कि आपका बच्चा क्यों गुस्सा हो रहा है। क्या वे मोबाइल गेम खेलना चाहते थे? क्या वे किसी दोस्त से बात कर रहे थे? उनकी भावनाओं को स्वीकार करें और उन्हें बताएं कि आप उन्हें समझते हैं। अगर आपका बच्चा मोबाइल में गेम खेलता है तो आप कोशिश करें कि आप अपने बच्चों के साथ इंडोर या आउटडोर गेम खेलें, आप उनकी भावनाओं को समझे उनसे बातें करें।

3. उन्हें विकल्प दें

बच्चे को यह न बताएं कि वे मोबाइल बिल्कुल नहीं देख सकते। इसके बजाय, उन्हें कुछ अन्य गतिविधियों में व्यस्त करने के लिए विकल्प दें। उन्हें किताब पढ़ने, खेलने, या बाहर जाने के लिए कहें। अगर आपको लग रहा है कि आपका बच्चा मोबाइल ज्यादा चला रहा है या मोबाइल चलाने की आदत बढ़ती जा रही है तो ऐसे में आप उसे ऐसा विकल्प दें कि हम बाहर गार्डन में घूमने चलें या फिर हम बाहर खेलते हैं।

4. नियम निर्धारित करें

मोबाइल के उपयोग के लिए स्पष्ट नियम और समय सीमा निर्धारित करें। बच्चे को इन नियमों के बारे में पहले से बताएं और उनका पालन करने पर ज़ोर दें। आजकल मोबाइल देखना सभी बच्चे चाहते हैं, ऐसे में कई बार आपका बच्चा दूसरे बच्चों को देखकर मोबाइल चलाने की इज्जत करता है। ऐसी स्थिति में आप उनका समय निर्धारित कर सकते हैं।

5. अनुशासन बनाए रखें

यदि बच्चा नियमों का पालन नहीं करता है, तो उन्हें शांत तरीके से समझाएं। ज़रूरत पड़ने पर, उन्हें कुछ देर के लिए मोबाइल से वंचित भी कर सकते हैं। लेकिन, ऐसा करते समय कठोर या क्रूर न बनें। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा मोबाइल ना चलाएं तो आपको भी अपने बच्चों के सामने मोबाइल का ज्यादा उपयोग नहीं करना चाहिए।

6. खुद बनें एक आदर्श

बच्चे अपने माता-पिता को देखकर सीखते हैं। यदि आप खुद ज़्यादातर समय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, तो बच्चा भी ऐसा ही करेगा। इसलिए, मोबाइल के उपयोग में संतुलन बनाए रखें और अपने बच्चे के लिए एक अच्छा उदाहरण पेश करें।

7. धैर्य रखें

बच्चों को आदत बदलने में समय लगता है। इसलिए, धैर्य रखें और लगातार प्रयास करते रहें। धीरे-धीरे, आपका बच्चा मोबाइल से स्वस्थ संबंध बनाना सीख जाएगा और गुस्से को नियंत्रित करना भी सीख जाएगा।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News नहीं करता।


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Bhawna Choubey

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इस रंगीन दुनिया में खबरों का अपना अलग ही रंग होता है। यह रंग इतना चमकदार होता है कि सभी की आंखें खोल देता है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कलम में बहुत ताकत होती है। इसी ताकत को बरकरार रखने के लिए मैं हर रोज पत्रकारिता के नए-नए पहलुओं को समझती और सीखती हूं। मैंने श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन इंदौर से बीए स्नातक किया है। अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए, मैं अब DAVV यूनिवर्सिटी में इसी विषय में स्नातकोत्तर कर रही हूं। पत्रकारिता का यह सफर अभी शुरू हुआ है, लेकिन मैं इसमें आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हूं।मुझे कंटेंट राइटिंग, कॉपी राइटिंग और वॉइस ओवर का अच्छा ज्ञान है। मुझे मनोरंजन, जीवनशैली और धर्म जैसे विषयों पर लिखना अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है। यह समाज को सच दिखाने और लोगों को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मैं अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करूंगी।

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