जिले में खपाने लाइ गई यूपी की 270 क्विंटल धान बरामद, तहसीलदार ने कलेक्टर को पेश की रिपोर्ट

इस मामले में कार्यवाही के बाद तहसीलदार रामबाबु देवांगन द्वारा रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर दीपक आर्य के समक्ष पेश कर दी गई है, जिसमें अब फैसला जिला प्रशासन को लेना है।

बालाघाट, सुनील कोरे| वर्तमान में जिले में समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी प्रारंभ है, जिसके साथ ही बिचौलिये और व्यापारी भी सक्रिय हो गये है। यूपी (UP) और बिहार (Bihar) से कम दामो में धान को लेकर जिले में समर्थन मूल्य में खपाने की तैयारियां हो रही है|  सूत्रों की मानें तो जिले में मोवाड़ बॉर्डर से यूपी और बिहार का धान बड़ी मात्रा में जिले मंे पहुंच रहा है और पूरी योजनाबद्व तरीके से समर्थन मूल्य में बाहर की धान को खपाने में जुटे लोग नेटवर्क की तरह काम कर रहे है, मसलन व्यापारी द्वारा भारी मात्रा में धान को ट्रको के माध्यम से मंगाया जा रहा है और अपने विश्वस्त किसानों और दलालो के यहां डंप करने का काम किया जा रहा है, बालाघाट (Balaghat) मंे यूपी और बिहार की धान की आवक को लेकर अब तक मामला खबरों तक ही सीमित था लेकिन बीती रात यूपी से जिले में एक व्यापारी द्वारा बुलाये गये धान से भरे ट्रक को तहसीलदार, नागरिक आपूर्ति निगम और पुलिस द्वारा संयुक्त कार्यवाही करते हुए ट्रक से 975 कट्टी में भरा 270 क्विंटल धान बरामद किया गया है। जो रविन्द्र लिल्हारे द्वारा उतरवाया जा रहा था। जब तक प्रशासनिक अमला कार्यवाही करने पहुंचता तब तक धान की कट्टी कुछ गोदाम में रखी जा चुकी थी, जबकि कुछ ट्रक में थी। जिसकी बरामदगी कार्यवाही के बाद बरामद धान को गोदाम मालिक के सुपुर्द कर दिया गया है।

इस मामले में कार्यवाही के बाद तहसीलदार रामबाबु देवांगन द्वारा रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर दीपक आर्य के समक्ष पेश कर दी गई है, जिसमें अब फैसला जिला प्रशासन को लेना है।

देर रात की गई कार्यवाही
तहसीलदार रामबाबु देवांगन को शाम लगभग 7.30 बजे सूचना मिली थी कि मानेगांव में यूपी का धान गोदाम में भंडारित किया जा रहा है। जिसके बाद तहसीलदार रामबाबु देवांगन, नागरिक आपूर्ति निगम और भरवेली पुलिस द्वारा संयुक्त कार्यवाही करते हुए जिले में यूपी से लाये गये धान को जप्त करने की कार्यवाही की गई। संयुक्त टीम ने ट्रक से लगभग 675 कट्टी धान जप्त किया है, जो लगभग 270 क्विंटल है। जिसमे से कुछ माल गोदामों में खाली हो चुका था इस वजह से गोदाम को भी सील किया गया है। वहीं ट्रक को जब्त कर थाने में खड़ा करा दिया गया है। बताया जाता है कि यह धान गायत्री राईस मिल संचालक हितेश अग्रवाल द्वारा बुलाया गया था। जिसे मिल न उतारकर मानेगांव में एक व्यक्ति के गोदाम में धान खाली किया जा रहा था।

जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रारंभ होने के साथ ही यूपी का धान को बालाघाट में लाया जाना, कई सवालों को जन्म दे रहा है। संभावना यह भी व्यक्त की जा रही है कि यूपी की धान को कम कीमत में लाकर यहां समर्थन मूल्य में खपाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इससे पहले ही मंगाया गया धान प्रशासनिक कार्यवाही में जब्त हो गया। जानकारी के अनुसार अन्य राज्यों की तूलना में अधिक वाजिब मूल्य मध्यप्रदेश में धान का किसानों को दिया जाता है। जिसका लाभ बिचौलिए और मिलर्स उठाते है, और अन्य राज्यों से घाटियां सस्ता धान लाकर सांठगाठ करके यहां बेच देते है या तो मिलिंग में इस्तेमाल कर लेते है। फिलहाल तहसीलदार की संयुक्त टीम ने रात में ही पूरी कार्यवाही कर 28 नवंबर को मामले की रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार द्वारा जिला प्रशासन को सौंप दी गई है। जिसमें अग्रिम निर्णय या फैसला अब जिला प्रशासन को लेना है।

मोवाड़ बॉर्डर से आ रही धान
सूत्रों की मानें तो सस्ती कीमत पर धान खरीदी कर युूपी, बिहार से खैरलांजी तहसील क्षेत्र अंतर्गत अन्य ग्रामों में ट्रको से बड़ी मात्रा में धान पहुंच रही है। यह धान दलालों के माध्यम से छोटे-छोटे किसानों के घर पर डंप हो रही है और उसी धान को दलाल द्वारा किसानों के माध्यम एवं कर्मचारियों से सेटिंग कर समर्थन मूल्य पर धान खरेदी केंद्र में बेचने का प्रयास शुरू हो गया है। चिंतनीय सवाल यह है कि जिले में प्रशासनिक क्षमता के बावजूद आखिर कैसे जिले में बेधड़क धान के ट्रक यूपी और बिहार से आ रहे है।

इनका कहना है
हमें सूचना मिली थी कि मानेगांव में यूपी के ट्रक से धान खाली किया जा रहा है, जब यहां पहुंचे तो पता चला कि ट्रक में भरे धान को खाली कराया जा रहा है, जिसको लेकर कोई वैधानिक दस्तावेज नही थे। जिस पर कुछ माल गोदाम में रखे जाने के कारण गोदाम को सील कर दिया गया है और ट्रक को जब्त कर भरवेली पुलिस की अभिरक्षा में खड़ा कर दिया गया है। जिले में यूपी का धान आना ही प्रथमदृष्टया संदेहास्पद है, ऐसा लगता है कि यूपी से मंगाई गई धान को किसी अन्य जगह खपाने की योजना थी। यदि मामला जांच में सही पाया जाता है तो दंडात्मक कार्यवाही की जायेगी। आम लोगों से भी अपील है कि यदि बाहर के धान जिले में कहीं भी उतरते हुए देखे जाते है तो उसकी सूचना प्रशासन को दे, जिस पर तत्काल कार्यवाही की जायेगी। पूछताछ में पता चला है कि गायत्री राईस मिल के संचालक हितेश अग्रवाल द्वारा यह धान मंगाया गया था। मामले की रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर महोदय के समक्ष पेश कर दी गई है।
रामबाबु देवांगन, तहसीलदार

मेरा खरीदा हुआ माल था। मैने बेचा। बरामद हुआ मतलब चोरी, डकैती का माल नहीं है, हम चोरी, डकैती नहीं करते, व्यापार करते है, माल पक्के में आया।
हितेश अग्रवाल, संचालक, गायत्री राईस मिल