लंपी बीमारी के चलते जिले में पशु हाट बाजार पर बालाघाट कलेक्टर ने लगाया प्रतिबंध

यह आदेश तत्काल प्रभावी हो गया है।

बालाघाट, सुनील कोरे। कोरोना महामारी की तरह प्रदेश में मवेशियों को हो रही लंपी बीमारी को देखते हुए सरकार ने निर्देश जारी किये है, वहीं जिले में लंपी बीमारी के चार संदिग्ध मिले मवेशियों की खबर के बाद बालाघाट कलेक्टर (balaghat collector) एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने पशुओं में लंपी वायरस संक्रमण फैलने की संभावना को देखते हुए धारा-144 के तहत जिले में पशु मेला, पशुओं के प्रदर्शन एवं पशु हाट बाजार लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है इसके साथ ही पशुओं के अन्य जिलों एवं राज्यों से जिले में प्रवेश, जिले में पशुओं के परिवहन एवं पशु मालिकों द्वारा पशुओं को जंगल या सार्वजनिक स्थलों पर चराने तथा सार्वजनिक जलाशय में पानी पिलाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभावी हो गया है।

यह भी पढ़े…यहां पढ़िए 27 सितंबर की मध्य प्रदेश की सभी बड़ी खबरें, केवल एक क्लिक पर

गौरतलब हो कि अब तक जिले में कोई भी लंपी बीमारी से ग्रसित मवेशी नहीं मिला है, लक्षण के आधार पर पशु चिकित्सा विभाग द्वारा 4 मवेशियों के सैंपल लेकर उसे जांच के लिए भोपाल लेब भेजा है। जिसकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है। ऐतिहातन के तौर पर कलेक्टर एवं जिलादंडाधिकारी द्वारा धारा 144 के तहत लगाये गये प्रतिबंधात्मक आदेश के बाद जिले में मवेशियों के लगने वाले हाट बाजार सहित सार्वजनिक स्थलो पर प्रतिबंध लगा दिया गया हैं।

यह भी पढ़े…AIIMS NORCET Result : जारी किया एम्स दिल्ली ने नोरसेट भर्ती 2022 का परिणाम, ऐसे करें चेक

लंपी बीमारी के चलते जिले में पशु हाट बाजार पर बालाघाट कलेक्टर ने लगाया प्रतिबंध

पशु चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त उप संचालक तथा सक्रिय पशु चिकित्सक डॉ. घनश्याम परते ने चर्चा के दौरान बताया कि वर्तमान में देश के विभिन्न प्रदेशों तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों में पशुओं में लम्पी नामक महामारी देखने सुनने में आ रही है। बालाघाट में चार संदिग्ध मवेशी मिले है, जिसमें लंपी बीमारी के लक्षण देखे गये है, जिसके सैंपल को जांच के लिए भेजा गया है। इसके अलावा जिले में गौपालक और कृषकों को लंबी बीमारी से बचाव को लेकर जागरूक किया जा है कि यदि वह लंपी बीमारी जैसे लक्षण वाले पशु को आईसोलेट करें, चूंकि यह एक संक्रमण बीमारी है और मच्छर या मक्खी के उड़कर एकदूसरे तक पहुंच सकती है, इसलिए मवेशी रखने वाले स्थान पर नीम की पत्ती का धुंआ करें। संभव हो सके तो नीम की पत्ती को उबालकर उस पानी से मवेशियों को नहलाये और उन्हें पौष्टिक आहार दे, ताकि मवेशियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।