सदर बाजार में पहले बनाये एवं बाद में तोड़े गए डिवाइडर पर जवाब दे नपा भिण्ड प्रशासन, ये विशुद्ध आर्थिक अपराध : डॉ रमेश दुबे

- उक्त मामले में किन-किन दोषियों पर क्या कार्यवाही की,ये भी उद्घोषित करें। - डिवाइडर और शौचालय निर्माण और तोड़ने का मामला।

भिण्ड,सचिन शर्मा। नगर पालिका भिण्ड (bhind) के द्वारा हाल ही में सदर बाजार में तोड़े गए नवनिर्मित डिवाइडर पर भाजपा नेता डॉ रमेश दुबे (BJP leader Dr Ramesh Dubey) ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए मामले को आर्थिक अपराध बताया है।

डॉ दुबे ने नगरपालिका प्रशासन को पत्र जारी कर कहा है कि पहले तो समाजसेवियों एवं जनता की मांग को मद्देनजर रखते हुए सदर बाजार में बीचोंबीच डिवाइडर को आवश्यकता से अधिक चौड़ा कर शौचालय आदि का निर्माण कराया गया क्योंकि शौचालयों की महती आवश्यता थी,लेकिन उसके क्रियान्वन में भविष्य में आवागमन में खड़ी होने वाली समस्याओं के प्रति दूरदर्शिता नहीं अपनाई गई।

उन्होंने कहा कि उक्त डिवाइडर जब बनकर तैयार हुआ तो अन्य निर्माण कार्य होने शेष थे जिन्हें नपा कराने में पूर्णतः अक्षम साबित हुई जिसकी वजह से ट्रैफिक की समस्या विकराल हो गयी,फिर अपनी गलती को छिपाने के लिए रातों रात उक्त डिवाइडर का बड़ा हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया और रात में ही मलबा उठवाकर फेंक दिया गया,मीडिया के द्वारा सवाल जवाब करने पर अनिभिज्ञता जाहिर की गई,इसके कुछ ही दिनों के बाद फिर से रात को भारी भरकम मशीनों डंफरों के साथ नपा अमला रात को उतरता है और पूरा का पूरा डिवाइडर ध्वस्त कर दिया जाता है इस दौरान कई गरीब ठेलेवालों के ठेले एवं उनके समान को तोड़कर उनके रोजगार की हत्या कर दी जाती है।

डॉ दुबे ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए नपा प्रशासन से कहा कि बिना किसी ठोस परिकल्पना के पहले से तो डिवाइडर बनाया गया और इसके बाद उसे तोड़ा गया, जिसकी वजह से जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और जनता के पैसे की सरासर बर्बादी हुई, उक्त मामले में परोक्ष एवं अपरोक्ष रूप से कतिपय लोगों को लाभ देने का संशय स्पष्ट प्रतीत होता है, उक्त मामला विशुद्ध आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है।

डॉ दुबे ने कहा कि उक्त मामले में हुई घोर अनियमितता को मद्देनजर रखते हुए आपने क्या क्या कदम उठाये एवं किन किन लोगों पर क्या क्या कार्यवाही प्रस्तावित करना आपेक्षित है, ये भी स्पष्ट करें, हम आंख मूंदकर ये सब होते नहीं देख सकते अन्यथा हमारे जनसेवा का लक्ष्य ही क्या शेष रहेगा, उक्त मामले की गंभीरता को समझते हुए पूर्ण स्पष्टवादिता के साथ सम्पूर्ण कार्यवाही का ब्यौरा समक्ष रखा जाए।