देवास: पिता की मौत के बाद इकलौते इंजीनियर बेटे का भी निधन, परिवार में छाया मातम

पिता की मौत के बाद इकलौते पुत्र सिविल इंजीनियर 24 वर्षीय आभास पर दु:खों का पहाड़ उमड़ गया। तबियत बिगड़ने पर उसे इंदौर शिफ्ट कर दिया गया। जहां जिंदगी और मौत से संघर्ष करते हुए उसने भी अंततः दम तोड़ दिया।

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देवास/बागली, सोमेश उपाध्याय। कोरोना (corona) के कहर ने देवास, बागली के श्रीवास्तव परिवार में कोहराम मचा दिया है। यहां केवल 12 दिन के भीतर ही पिता-पुत्र की मौत (death) हो गई। पूर्व पार्षद, इंजीनियर व समाजसेवी (social worker) अनिल कुमार श्रीवास्तव का बीते 16 अप्रैल को कोरोना से लड़ते हुए इंदौर (indore) के निजी अस्पताल में निधन हो गया था। पिता की मौत के बाद इकलौते पुत्र सिविल इंजीनियर 24 वर्षीय आभास पर दु:खों का पहाड़ उमड़ गया। तबियत बिगड़ने पर उसे इंदौर शिफ्ट कर दिया गया। जहां जिंदगी और मौत से संघर्ष करते हुए उसने भी अंततः दम तोड़ दिया। फरवरी माह में ही आभास की दादी व शिक्षाविद उर्मिला श्रीवास्तव(अम्माजी) की भी अस्वस्थता के बाद मृत्यु हो गई थी।

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इंजी.श्रीवास्तव प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक़ रखते थे। वे नगर में सभी की मदद के लिए तैयार रहते थे। परिवार में अचानक आई दुःखद विपदा ने हँसते-खेलते परिवार की खुशियों पर गृहण लगा दिया। आभास की अंतिम क्रिया कोरोना प्रोटोकॉल के तहत इंदौर में ही सम्पन्न हुई। बड़े पिता अरविंद श्रीवास्तव व चाचा अतुल श्रीवास्तव ने अंतिम कार्य सम्पन्न करवाया।आभास की माँ अर्चना श्रीवास्तव पति और फिर इकलौते बेटे के गम में बेसुध थी। परिवार में एक विवाहित बेटी भी है जो सागर नगर निगम में अधिकारी है।

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आभास सादगीपसंद प्रतिभाशाली सिविल इंजीनियर था जो पिता के कार्य मे भी हाथ बटाता था। वहीं अनिल श्रीवास्तव सहित दोनों भाइयों में भी अपार प्रेम था। तीन माह के भीतर ही परिवार की तीन पीढ़ी के चले जाने से नगर सहित क्षेत्र में भी शोक की लहर छा गई। लोगो ने दुःखी मन से श्रद्धांजली और संवेदनाएं व्यक्त की।