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Gwalior News : पंचायतों में बड़ा घोटाला, करोड़ों खर्च करने के बाद भी जिले से हरियाली गायब

Written by:Atul Saxena
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Gwalior News : पंचायतों में बड़ा घोटाला, करोड़ों खर्च करने के बाद भी जिले से हरियाली गायब

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। पर्यावरण बचाने और हरियाली बढ़ाने के नाम पर हर साल ग्वालियर (gwalior) में करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं, हरियाली महोत्सव मनाकर बड़े स्तर पर पौधरोपण (plantation) कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। लेकिन इसकी जमीनी हकीकत में गोलमाल ही गोलमाल (scam) दिखाई देता है। पिछले कुछ सालों में ग्वालियर अंचल में करोड़ों रुपये खर्च कर लाखों पौधे लगाए गए लेकिन यहाँ आज भी हरियाली इन्तजार कर रही है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हर साल पर्यावरण बचाने और हरियाली बढ़ाने का सन्देश देते हैं इस साल तो उन्होंने साला भर तक रोज एक पौधा लगाने का संकल्प लिया है जिसे वे निभा भी रहे हैं लेकिन ग्वालियर जिले की पंचायतों में बैठे सरपंचों और सचिवों के लिए पौधरोपण महज एक सरकारी आयोजन है, हर साल वे हरियाली महोत्सव के दौरान सरकारी आयोजन में पौधरोपण करते हैं और बस उनका काम ख़त्म हो जाता है, कितने पौधे जिंदा बचे और कितने ख़त्म हो गए इससे उनका कोई वास्ता नहीं होता।

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गौरतलब है कि मध्यप्रदेश की पंचायतों में घोटाले होना कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब ये घोटाला सीधे आपके स्वास्थ्य पर असर डाले तो चिंता होना स्वाभाविक है। दरअसल ग्वालियर अंचल की 60 पंचायतों में बड़े स्तर का घोटाला पकड़ में आया है। ये घोटाला किया गया है हरियाली के नाम पर। इसमें खास बात ये है कि इसको अंजाम देने वाले पंचायतों के सचिव और संरपच ही हैं। जिनसे अब घोटाले की राशि तो वसूली की जा रही है, साथ ही भ्रष्टाचार  अधिनियम के तहत संबधित थाना क्षेत्रों में मामले दर्ज कराए जा रहे हैं।

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जानकारी के मुताबिक ग्वालियर जिले (gwalior district) में हरियाली के लिए 2009 से पिछले साल तक लगभग 9 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। इन पौधों पर लगभग 63 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बाद भी अंचल में हरियाली विकसित नहीं सकी है। जनता के खजाने से खर्च हुई राशि में से केवल 25 पहाड़ियां ही ऐसी हैं, जहां सघन हरियाली दिखती है। इसके अलावा अधिकतर पंचायतों में स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। हालत ये है कि सिकरौदा, बेरू, अर्रू सहित करीब दो दर्जन पंचायतें ऐसी हैं, जहां पौधारोपण में जमकर गोलमाल हुआ और इनकी जांच भी हुई। लेकिन सबकुछ फाइलों तक ही सीमित रहा।

2009 से 2020 तक इतने पेड़ लगाए गए

– जनपद भितरवार की 15 पंचायतों में 93,300 पौधे लगाए गए थे।
– जनपद मुरार की 17 पंचायतों में 1,48,800 पौधे लगाए गए थे।
– जनपद घाटीगांव की 17 पंचायतों में 1,50,600 पौधे लगाए गए थे।
– जनपद डबरा की 19 पंचायतों में 1,51,350 पौधे लगाए गए थे।

2009 से 2020 तक ये राशि हुई खर्च

– 2009 से 2012 तक पूरे जिले में लगभग 33 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।
– 2012 से 2015 तक पूरे जिले में 22 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।
– 2015 से 2018 तक पूरे जिले में 7.48 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।
– 2019 से 2020 तक पूरे जिले का खर्च लगभग 1.50 करोड़ रहा है।

इनमें खास बात ये है कि ग्वालियर जिले की डबरा जनपद की पंचायत अर्रू (अब नगर पालिका का हिस्सा) है में  वृक्षारोपण, सामुदायिक वृक्षारोपण सहित अन्य योजनाओं में 14 लाख रुपए खर्च किए गए थे। तत्कालीन समय में ऑडिट के दौरान तत्कालीन सहायक उद्यानिकी अधिकारी एमपीएस बुंदेला सहित अन्य अधिकारियों ने जांच की तो सिर्फ नौ पौधे जीवित मिले थे। पौधे थैलियों में रखे रखे सूख गए थे और तार फेंसिंग भी निजी काम में ली गई थी। इसके बाद से अभी तक यह जांच पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में जिम्मेदारों पर भी कई सवाल खड़े हो रहे है।

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उधर गोलमाल के बावजूद साल दर साल बरसाती सीजन में नए सिरे से हरियाली के लिए प्लान बनते हैं और पिछले सालों में हुई आर्थिक अनियमितताओं की फाइलों पर धूल चढ़ती जा रही है। हालाँकि आर्थिक अनियमितताओं को लेकर अंचल के करीब सात सरपंचों पर कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन यह कार्रवाई होने के बाद भी फर्जीवाड़ा करने वालों से राशि वसूली नहीं हो सकी है। इसको लेकर साल 2010 से प्रकरण चल रहे हैं और पांच सीईओ भी बदल चुके हैं, फिर भी जांच के परिणाम सामने नहीं आए। हांलकि जिला पंचायत के नए सीईओ किशोर कान्याल का कहना है कि पंचायतों में घोटाला पकड़ में आया है, दोषियों के खिलाफ एक्शन लिया जा रहा है और वसूली की जा रही है।

बहरहाल अब देखना ये होगा कि हरियाली के घोटालों की फाइलों पर पड़ी धूल कब तक साफ होती है और पौधरोपण को महज सरकारी आयोजन समझकर औपचारिकता निभाने वाले पर्यावरण के दुश्मन सरपंच और सचिवों पर कब तक  एक्शन लिया जाता है और राशि वसूली जाती है।

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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