कश्मीर और शिमला के बाद अब जबलपुर के सेब, अंतिम चरण में प्रोजेक्ट

जबलपुर, डेस्क रिपोर्ट। जल्द ही अब लोगो को जबलपुर के सेब खाने मिलेंगे, सुनकर चौंक गए न आप, दरअसल जबलपुर में प्रदेश की सबसे बड़ी जवाहर लाल नेहरू कृषि यूनिवर्सिटी जबलपुर में सेब खेती की नई संभावनाएं तलाशने में जुटी है। विश्वविद्यालय में अनुसंधान के तौर पर सेब का पौधा लगाया गया था जो अब दो साल का पौधा होने के बाद पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं। अब उसमें फल आने का इंतजार किया जा रहा है।

सेब की खेती है संभव

कृषि विश्वविधालय के इस अनुसंधान के बाद अब जबलपुर भी सेब की खेती में पहचान बना सकता है। यहां पूरी परिस्थितियां हैं। अमरकंटक में सेब व नाशपाती की कई वर्षों पहले खेती होती रही है। कृषि विवि में दो साल पूर्व सेब के पौधे लगाए गए हैं, जो अच्छी बढ़वार लिए हैं। माना जा रहा है कि यदि यहां की परिस्थितियों में पौधे सर्वाइव नहीं करते तो अब तक सूख चुके होते।

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जबलपुर का मौसम है अनुकूल

सेब के लिए जबलपुर का मौसम काफी अनुकूल माना जा रहा है। यहां साल भर धूप होती है। मिट्‌टी का पीएच 5 से 7 के बीच होनी चाहिए। यहां की मिट़टी भुरभुरी वाली है। इसके पौधे में पानी नहीं लगना चाहिए। वहीं इसके पौधे के लिए ठंड जरूरी है, लेकिन पाला नहीं पड़ना चाहिए। यहां ठंड में 7 से 20 डिग्री तक तापमान रहता है। सेब के पौधे तीन से चार साल में फलने लगते हैं। सितंबर-अक्टूबर के मध्य इसमें फूल आते हैं। 130 से 135 दिनों में ये तैयार हो जाते हैं। यानि कुल मिलाकर देखा जाए तो जबलपुर का मौसम सेब के पौधे के लिए अनूकूल है, जिसके बाद यह तय माना जा रहा है कि अपने इस शोध में जबलपुर कृषि विश्वविधालय सफलता हासिल कर सकता है।