Morena : श्मशान घाट में अव्यवस्थाओं से परेशान ग्रामीण, खेत में टीन शेड लगाकर किया अंतिम संस्कार

इस पूरे मामले में एडीएम ने नरोत्तम भार्गव से बात की गई तो उनका कहना है कि यह मामला उनकी जानकारी में नहीं है, इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और जो भी सुख सुविधा होंगी उनकी व्यवस्था की जाएगी।

मुरैना, संजय दीक्षित। मुरैना (Morena) के अंबाह थाना क्षेत्र की पलपुरा पंचायत के कटारे का पुरा गांव में एक अजिबो-गरीब मामला देखने को मिला है। जहां श्मशान घाट में टीन शेड तक की व्यवस्था नहीं होने की वजह से एक परिवार ने अपने खेत में ही शव का अंतिम संस्कार किया।

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दरअसल गांव में शमशान घाट में अव्यवस्थाओं के कारण शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। और हुआ वही बारिश अधिक होने के कारण मृतक के शव को घर में ही करीब 12 घंटे तक रखना पड़ा था। उसके बाद जब बारिश की बूंदे धीमी हुई तो लोगों ने खेत में जाकर अस्थाई रूप से टीन शेड लगाकर और मिट्टी का चबूतरा बनाकर उसके नीचे मृतक का अंतिम संस्कार किया। प्रशासन के द्वारा कई पंचायतों में श्मशान घाट के लिए राशि भी स्वीकृत की जाती है। लेकिन पंचायत के सरपंच और सचिव मिलकर इस राशि को हड़प जाते है। जिस कारण लोगों को अंतिम संस्कार करने में परेशानी आती हैं।

जानकारी के अनुसार अंबाह के पलपुरा पंचायत में रहने वाले कटारे का पुरा गांव में युवक नत्थी सिंह पुत्र मलखान सिंह उम्र 56 वर्ष का निधन हो गया था ।निधन के बाद मृतक के अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू की जा रही थी, उधर लगातार बारिश हो रही थी ,गांव में जो शमशान है वहां खाली मैदान है वहां टीन शेड तक उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा श्मशान में घुटने-घुटने तक पानी भरा हुआ है। कीचड़ अधिक होने के कारण शमशान तक पहुंचने में ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मृतक की मौत के बाद परिजन बारिश के रुकने का काफी देर तक इंतजार करते रहे लेकिन काफी समय तक बारिश नहीं रुकी। अंतिम संस्कार के लिए पूरी रात भर लाश को घर में ही रखना पड़ा। जिसके बाद सुबह होने पर अगले दिन ग्रामीणों ने खेत मे ही टीन शेड लगा कर अस्थाई रूप से श्मशान घाट बनाकर मृतक का अंतिम संस्कार किया।

बतादें कि मुरैना जिले में कई ऐसी ग्राम पंचायत हैं जिनमें अभी तक मृतक का अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाट नहीं बनाए गए हैं। ग्रामीणों को या तो खुले में अंतिम संस्कार करना पड़ता है या फिर टीन शेड लगा कर स्वमं व्यवस्था कर मृतकों का अंतिम संस्कार करना पड़ता है। गाँव से श्मशान घाट दूर होने कारण शव को श्मशान में ले जाने की बजाय मृतक को उसके खेत में ही जला दिया जाता है। जिन जगहों पर श्मशान घाट बनाए भी गए हैं वहां पर बारिश के पानी को रोकने के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए सड़क तक भी व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों को कीचड़ में जाकर शमशान तक पहुंचना पड़ता हैं। लेकिन जैसे- तैसे ग्रामीण पहुंच भी गए तो बारिश में शव को जलाने के लिए टीन शेड तक उपलब्ध नहीं है। इन सब मुसीबतों से बचने के लिए ग्रामीण अपने ही खेत में मृतक के शव को जलाने पर मजबूर होते हैं।

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गौरतलब है कि एक ऐसा ही मामला है गैपरा गांव में देखने को मिला था जहां 12 जुलाई को 75 वर्षीय गौरा बाई का निधन हो गया था। जब लाश को जलाने के लिए शमशान में ले गए तो टीन शेड ना होने की वजह से बारिश में चिता बुझने का डर सता रहा था। जिसके बाद ग्रामीणों ने त्रिपाल लगाकर उसके नीचे मृतक का अंतिम संस्कार किया। जब खबर को “एमपी ब्रेकिंग न्यूज़” ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। तब कहीं जाकर जिला प्रशासन ने श्मशान में टीन शेड बनाने के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए की राशि स्वीकृत की। इस पूरे मामले में एडीएम ने नरोत्तम भार्गव से बात की गई तो उनका कहना है कि यह मामला उनकी जानकारी में नहीं है, अगर शवों को जलाने के लिए इस तरह की स्थिति उत्पन्न हो रही है तो इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और जो भी सुख सुविधा होंगी उनकी व्यवस्था की जाएगी।