लापरवाही : वन विभाग के डिपो में रखे जब्त वाहनों से कलपुर्जे सहित रेत हुआ गायब

वनचौकी पर राजसात किए गए 300 से ज्यादा वाहन रखे हैं।

मुरैना, संजय दीक्षित। देवरी चंबल अभ्यारण के अधिकारियों के द्वारा अवैध रेत की धरपकड़ के लिए अभियान चलाया जाता है जिसमें अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर ट्रॉलीयों को पकड़कर वन चौकी में वन विभाग और एसएएफ की सुपुर्दगी में रख दिया जाता है। जब इन वाहनों को पकड़ा जाता है, तब इनमें लबालब रेत भरा रहता है, लेकिन वनचौकी पर जाते ही इनका रेत गायब हो जाता है। नेशनल हाइवे 3 पर स्थित वनचौकी पर एसएएफ की एक कंपनी के अलावा वनकर्मियों की निगरानी होने के बाद भी जब्ती व राजसात हुए वाहनों से रेत का गायब होना एक अचंभित करने वाला मामला है। जब्ती का रेत माफिया कहा गया है, इसको बताने वाला कोई नहीं है।

लापरवाही : वन विभाग के डिपो में रखे जब्त वाहनों से कलपुर्जे सहित रेत हुआ गायब

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गौरतलब है कि घड़ियाल सेंक्चुरी होने के कारण चंबल नदी से रेत उत्खनन करना अवैध है, इसके बाद भी रेत माफिया यहां सक्रिय हैं। इन्हें रोकने के लिए वन विभाग व पुलिस टीमें अवैध रेत के साथ वाहन को भी जब्त कर राजसात कर देते हैं। पकड़ने के बाद रेत से भरे वाहनों को वनचौकी पर भेजा जाता है। इस वनचौकी पर वर्तमान में हालत यह है कि जो वाहन रेत के साथ राजसात या जब्त हो चुके हैं, उनमें से अधिकांश में रेत बचा ही नहीं हैं। सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से लेकर दर्जनों अन्य वाहन खाली रखे हैं। कई ट्रक भी यहां अवैध रेत परिवहन में राजसात किए गए हैं, जिनमें से कुछ का रेत गायब हो चुका है। इस चौकी पर केवल उन्हीं वाहनों में रेत नजर आ रहा है, जिन्हें एसडीओ श्रद्धा पांढरे ने पकड़ा हैं। केवल रेत ही नहीं यहां से वाहनों की बैट्रियां व टायर तक बदले जा चुके हैं। यहां सबसे बड़ी लापरवाही यह भी है कि वन विभाग अवैध रेत के साथ पकड़े गए वाहनों की नीलामी भी नहीं करता।

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दरअसल, वनचौकी पर राजसात किए गए 300 से ज्यादा वाहन रखे हैं। इनमें 10 से 15 साल पुराने ट्रैक्टर-ट्रॉली से लेकर ट्रक, डंपर, जेसीबी तक हैं। दर्जनों वाहन गलकर पूरी तरह कबाड़ हो गए हैं। कई वाहन तो आधे मिट्टी में दब गए हैं, कई वाहनों के चारों ओर जंगल उग आया है तो कई ट्रेक्टर-ट्रॉली व ट्रकों में ही बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं। वन चौकी के अलावा जिलेभर के पुलिस थानों में भी वन विभाग द्वारा राजसात किए गए डेढ़ सैकड़ा से ज्यादा वाहन रखे हुए हैं, जिनमें से जंग से गलकर कबाड़ हो चुके हैं। अगर यह वाहन समय पर नीलाम कर दिए जाते तो शासन को करोड़ों रुपये का राजस्व मिल सकता था, जिसका नुकसान हो चुका है।

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एसडीओ वन विभाग प्रतीक दुबे ने बताया कि रेत व कलपुर्जे गायब होने का मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं हैं मुझे आपके द्वारा जानकारी मिल रही हैं अगर ऐसा है तो में उसमें जाँच करवा लेते हुआ और जो भी अपराधी पाया जाता हैं उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।