सांसद-विधायक पर फूटा 35 गांवों के किसानों का गुस्सा, कार्यक्रम का किया बहिष्कार

श्योपुर।

प्रदेश में पंद्रह सालों से राज कर रही प्रदेश की शिवराज सरकार इन दिनों विकास यात्रा पर अपना फोकस किए हुए है। मंत्री, सासंद और विधायक गांव गांव जाकर इस विकास यात्रा के माध्यम से अपनी योजनाओं और कार्यों का बखान कर रहे है। लेकिन अधूरी घोषणाएं और झूठे वादों से नाराज जनता अब अपना गुस्सा सरकार के इन नेताओं पर निकालने से भी नही चूक रही है। बीते दिनों सिवनी में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को ग्रामीणों का विरोध झेलना पड़ा था । इस दौरान लोगों ने मुर्दाबाद के नारे भी लगाए थे, जनता का गुस्सा देख सांसद भी असहज हो गए और वहां से पैदल ही कार्यक्रम स्थल के लिए निकल गए। 

अब एक बार फिर ऐसा ही श्योपुर में हुआ है।इस बार जनता के गुस्से के शिकार सांसद अनूप मिश्रा और बीजेपी विधायक दुर्गालाल विजय समेत बीजेपी के कई जनप्रतिनिधियों को होना पड़ा।गुस्साए ग्रामीणों और किसानों ने कार्यक्रम का ना सिर्फ बहिष्कार किया बल्कि सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। इसके अलावा रामगांवड़ी में बुर्जुग व महिलाओं ने सांसद को घेर लिया और उनसे पानी दिलाने की मांग की, जिस पर सांसद ने सरपंच को शुक्रवार को उनके पास बुलाया, ताकि वह बोर में डालने के लिए मोटर दिला सके। 

दरअसल, गुरुवार को सांसद अनूप मिश्रा और बीजेपी विधायक दुर्गालाल विजय समेत बीजेपी के कई जनप्रतिनिधियों  विकास यात्रा कार्यक्रम में शामिल होने किशोर पुरा,रामगांवडी समेत अन्य कार्यक्रम स्थलों पर पहुंचे थे। जहां नहर निर्माण ना कराए जाने से नाराज किसानों का गुस्सा इन मंत्रियों पर फूट पड़ा और उन्होंने सरकार के कार्यक्रमों का बहिष्कार कर डाला । इतना ही नही किसान और ग्रामीण कार्यक्रम स्थलों से तीस से चालीस मीटर की दूरी पर सभी जमा हो गए और जमकर नारेबाजी करना शुरु कर दी।नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन से सांसद नाराज हो गए ।

स्थिति यह थी कि सांसद के कार्यक्रम में किसानों द्वारा बहिष्कार किए जाने के बाद कुर्सियां खाली पड़ी रही, जिन्हे भरने के लिए सांसद के साथ गाड़ियों में भरकर आए पार्टी कार्यकर्ता और संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, रोजगार, सहायक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के परिवारजन और बच्चों को बिठाकर कुर्सियां भरने की कोशिश की बावजूद इसके चंद कुर्सियों को छोड़कर अधिकतम कुर्सियां खाली ही रह गईं। इसके बाद कार्यक्रम के बीच में भी किसानों ने नहर को लेकर जमकर नारेबाजी की। 

आक्रोशित किसानों का कहना था कि वे नहर की स्वीकृति के लिए सात बार भोपाल होकर आ गए हैं, लेकिन अबतक मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद औऱ विधायक में से किसी ने भी उनकी इस मांग पर गौर नही किया ।किसानों का साफ कहना था कि जब तर नहर निर्माण को स्वीकृति नही मिलेगी तब तक वोट नहीं दिया जाएगा।बता दे कि श्योपुर इलाके के यह वही 35 गांव हैं जो नहर की मांग के लिए सर्दियों में धरना-आंदोलन कर चुके हैं।इन किसानों की मांग है कि चंबल नहर से नहर निकालकर उनके बंजर पड़े खेतों को सिंचित किया जाए।