हमेशा के लिए बंद हो गए ये 8 बैंक, कंगाली की कगार पर थे खड़ें, RBI ने रद्द कर दिया लाइसेंस, पढ़ें पूरी खबर

Manisha Kumari Pandey
Published on -
rbi action

RBI Cancelled Banking License: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सितंबर महीने में कई बैंकों पर कारवाई की। जिसके तहत देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित 8 सहकारी बैंक बंद हो गए। आरबीआई ने 20 सितंबर से लेकर 30 सितंबर के बीच 8 बैंकों का लाइसेन्स रद्द किया। साथ ही ग्राहकों को एक सीमित राशि निकालने की अनुमति प्रदान की है।

इन बैंकों पर लगा ताला

पिछले महीने केन्द्रीय बैंक ने सबसे पहले केरल के त्रिवेंद्रम में स्थित अनंतशयनम सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द किया था। बैंक पर यह कार्रवाई 21 सितंबर को की गई थी। 22 सितंबर को एचसीबीएल सहकारी बैंक लिमिटेड (लखनऊ) का लाइसेंस रद्द हुआ था। लखनऊ के को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर आरबीआई का 30 सितंबर को टूटा। इसके अलावा पिछले महीने मल्लिकार्जुन पट्टाना सहकारी बैंक नियामिता (मास्की, कर्नाटक), नेशनल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (यूपी), द कपोल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (मुंबई), मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (अहमदाबाद, गुजरात) और नासिक जिला गिरना सहकारी बैंक लिमिटेड (महाराष्ट्र) के बैंकिंग व्यवसाय पर भी रोक लगा दिया।

क्यों बंद हुए बैंक?

आरबीआई ने सभी बैंकों पर कार्रवाई करने के लिए समान वजह बताई। सेंट्रल बैंक ने बताया इन बैंकों के पर्याप्त पूंजी और कमाई की संभावनाएं नहीं है। यदि ये बैंक कारोबार जारी रखते हैं तो सार्वजनिक हित पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। इन बैंकों का बने रहना उसके ग्राहकों के लिए हानिकारक है।

ग्राहक निकाल सकते हैं इतने पैसे

डीआईसीजीसी के नियमों के तहत इन बैंकों के प्रत्येक ग्राहक को 5 लाख रुपये की मौद्रिक सीमा तक अपनी जमा राशि की जमा बीमा दावा राशि प्राप्त करने की अनुमति है।

 


About Author
Manisha Kumari Pandey

Manisha Kumari Pandey

पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।"

Other Latest News