Gwalior News : जया किशोरी ने बताया राजनीति का स्वरूप, हिंदू राष्ट्र पर कही बड़ी बात

Amit Sengar
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Gwalior News : प्रसिद्ध कथा वाचक जया किशोरी ने मीडिया से बात करते हुए राजनीति का स्वरूप बताया, उन्होंने कहा कि कृष्ण सी की जाए तो अच्छी और दुर्योधन सी की जाए तो युद्द हार जायेंगे। हिंदू राष्ट्र के सवाल पर जया किशोरी ने कहा कि सनातन धर्म आगे बढ़ेगा तो मुझे अच्छा लगेगा लेकिन जो भी हो वो कानून के दायरे में होना चाहिए।

ग्वालियर के इंटक मैदान हजीरा पर 3 से 5 जुलाई तक जया किशोरी जी की “नानी माँ का मायरा- श्री कृष्ण कथा” का आयोजन हो रहा है, कार्यक्रम का आयोजन युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव मितेंद्र दर्शन सिंह कर रहे हैं, जया किशोरी आज ग्वालियर पहुंचीं, उन्होंने मीडिया से बात की और सवालों के जवाब दिये।

जया किशोरी ने कहा कि आज युवा अध्यात्म की तरफ मुड़ रहा है क्योंकि उसे यहाँ आकर कुछ फायदा हो रहा होगा वरना वो आज इतना व्यस्त है कि तीन चार घंटे निकालना असंभव जैसी बात है, मेरी कथा में बहुत युवा आते हैं, ग्वालियर में तो युवा ही मेरी कथा के आयोजक हैं।

राजनीति से जुडे सवाल पर जया किशोरी ने कहा कि राजनीति धर्म की सीख लेकर करें तो अच्छी बात है, उन्होंने कहा कि यदि कृष्ण सी राजनीति की जाए , उन्होंने महाभारत में राजनीति ही की लेकिन दुर्योधन जैसी राजनीति करेंगे तो पराजय मिलना निश्चितहै। राजनीति में प्रवेश के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनका बिल्कुल मन राजनीति में आने को नहीं है।

अपनी सत्ता के लिए नेताओं के संतों की शरण में जाने के सवाल पर जया किशोरी ने कहा कि अच्छी, देश को आगे ले जाने के भाव के साथ यदि कोई संत के पास जाता है तो इसमें कोई बुराई नहीं है, सोच के साथ कोई अगर किसी व्यक्ति के साथ जाता है तो उसमें किसी तरह की बुराई नहीं है, वैसे भी संतों ने हमेशा समाज को दिशा दिखाई है।

फिल्म आदि पुरुष में रामायण के पात्रों का गलत चित्रण होने और संवाद को लेकर मच रहे विवाद पर जया किशोरी ने कहा कि फिल्म कैसे पास हुई यह सरकार का मामला है और सरकार की सरकार जाने लेकिन मैं तो इतना ही कहना चाहूँगी कि आप जो देख रहे हैं वह देखिए लेकिन उससे जुड़ी नॉलेज भी रखिए, बहुत कंटेंट हैं लेकिन ईश्वर ने सबको समझने की बुद्धि दी है अपने विवेक से काम लें कि क्या देखना है क्या नहीं, मुझे जो अच्छा लगता है वही देखती हूँ वरना बंद कर देती हूँ।
ग्वालियर से अतुल सक्सेना की रिपोर्ट


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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।”

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