राम मंदिर का न्योता ठुकराने वालों पर जयभान सिंह पवैया का निशाना, बोले- मंथरा तो मर गई लेकिन उसकी आत्मा अभी भी जिंदा

Atul Saxena
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Jaibhan Singh Pawaiya, Gwalior News

Jaibhan Singh Pawaiya’s target on opposition, Gwalior News : 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है, भव्य और विशाल राम मंदिर के गर्भगृह में पूरे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रामलला 500 साल के लंबे संघर्ष के बाद फिर से गर्भ गृह में विराजेंगे, इस पल को आज पूरा देश जी रहा हैं, खुशियाँ मना रहा है, दीवाली मना रहा है, खुद को ये पल देखने के लिए सौभाग्यशाली भी मान रहा है लेकिन कांग्रेस ने इस कार्यक्रम का न्योता ठुकराकर भाजपा सहित राम भक्तों को एक मुद्दा दे दिया है, प्रखर हिंदूवादी नेता, पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने न्योता अस्वीकार करने पर कांग्रेस पर बड़ा हमला किया है।

बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया आज महाराज बाड़े पर स्थित हनुमान मंदिर की पूजा अर्चना कर और राम भक्तों और अयोध्या आंदोलन में उनके साथ शामिल रहे ग्वालियर चंबल संभाग के सैकड़ों कार सेवकों पर पुष्प वर्षा कर  अयोध्या रवाना हो गए,  रवाना होने से पूर्व मंत्री पवैया ने कहा कि आज मैं भावनाओं को शब्दों का आकार नहीं दे पा रहा,
ये जीवन सार्थक हो रहा है, मैं आज अयोध्या जी प्रस्थान कर रहा हूँ।

मैं तो केवल प्रतीक हूँ : जयभान सिंह पवैया 

उन्होंने कहा कि मैं केवल प्रतीक हूँ, लाखों लोगों की भावनाओं के पुष्प लेकर राम लला के चरणों में चढ़ाने जा रहा हूँ,  ग्वालियर चंबल के कारसेवकों ने रामकाज के लिए बहुत शहादत दी है इसलिए कारसेवकों पर पुष्प वर्षा करके और संतों का आशीर्वाद लेकर हम अयोध्या जा रहे हैं।

राम मंदिर को लेकर कोप भवन में बैठे लोगों पर पवैया का निशाना  

कांग्रेस द्वारा न्योता अस्वीकार किये जाने और राम मंदिर पर सवाल उठाकर कोप भवन में बैठे लोगों से जुड़े सवाल पर जयभान सिंह पवैया ने कहा कि हम 22 जनवरी के पर्व को बहुत सकारात्मक दृष्टि से देख रहे हैं, देश के जीवन में कभी कभी ऐसे पल आते हैं जब जातियों और पार्टियों की सीमाएं तोड़कर भी राष्ट्र के सम्मान के लिए सबको उठकर खड़ा होना चाहिए।

राम मंदिर का न्योता ठुकराने वालों को पवैया ने कहा अभागा 

उन्होंने कहा कि जिनको निमंत्रण दिया गया, उनको उस सौभाग्य को स्वीकार करना चाहिए था, लेकिन उन लोगों का अभागापन हम कैसे दूर करें, जिन्होंने रामलला के न्योते को ही ठुकरा दिया,  इसलिए कभी कभी लगता है कि मंथरा तो मर गई  मगर मंथरा की आत्मा भारत में अभी भी जिंदा है, पवैया बोले –  जब 22 जनवरी को दिया जले  तो कोई कोप भवन में बैठकर ना रहे ध्यान रहे इतिहास उन्हें क्षमा नहीं करेगा।

22 जनवरी वाले दिन के लिए ये अपील की पवैया ने 

मंच से 22 जनवरी को दीपक जलाने का आह्वान करने के सवाल पर जयभान सिंह पवैया ने कहा कि इस समय तो सब राम की संतान हैं, कौन कांग्रेस का? कौन भाजपा का? इसे भूल जाइए, जिसकी भी रगों में राम का रक्त बह रहा है, उसके घर पर 22 जनवरी को अंधेरा नहीं रहेगा, लेकिन जिसको अपने लहू पर ही भरोसा नहीं हो उसके घर के अंधेरे का हम क्या कर सकते हैं?

ग्वालियर से अतुल सक्सेना की रिपोर्ट 


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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

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