Jabalpur News : आंगनबाड़ी केंद्रों में लटका ताला, मासूमों को नहीं मिल रहा है पोषण आहार

Amit Sengar
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Jabalpur News : मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल मासूमों के पोषण पर भारी पड़ रही है। जबलपुर में आंगनबाड़ियों में 15 मार्च से ताले लटके हैं और आशा-ऊर्षा कार्यकर्ताओं सहित हड़ताली अमला सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने मैदान पर है। हालात ये हैं कि महिला एवं बाल विकास सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी पालन नहीं करवा पा रहा जिसमें ज़रुरतमंद बच्चों तक 300 दिन का पोषक आहार पहुंचाना ज़रूरी है। सैकड़ों की तादात में रैली निकालती आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं के बाद अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी केन्द्रों के दरवाजे बंद कर दिए है।

9 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार से आर-पार की लड़ाई

जबलपुर में 2 हजार 483 आंगनबाड़ी केन्द्र बंद होने से ना बच्चों को पोषण आहार मिल पा रहा है और ना ही गर्भवती महिलाओं को। 15 मार्च से संयुक्त मोर्चे बैनर तले परियोजना अधिकारी,पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका ने हड़ताल कर दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 15 दिन से जारी हड़ताल पर सरकार ने कोई सुध नहीं ली है लेकिन अब वेतन बढ़ाने सहित अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार से आर-पार की लड़ाई होगी।

हड़ताल से इस निर्देश का नहीं हो रहा है पालन

सुप्रीम कोर्ट की गाईडलाईन के मुताबिक ज़रुरतमंद बच्चों को साल में 300 दिन का पोषक आहार हर हाल में देना ज़रुरी है। इधर हड़ताल से इस निर्देश का पालन नहीं हो रहा और महिला एवं बाल विकास विभाग परेशान हैं। अधिकारियों के मुताबिक उन्होने पोषक आहार वितरण के लिए दूसरे विभागों की मदद के लिए पत्र लिखा है और उम्मीद है कि आने वाले कुछ दिनों में आंगनबाड़ियों में लटके ताले खुलवाकर वितरण शुरु करवाया जा सके।
जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट


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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।”

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