Neemuch News : खरबूजे को देखकर खरबूजे का रंग ही नहीं.. इंसान की नीयत भी बदलती है, पढ़ें क्या है पूरा मामला

एसपी अंकित जायसवाल ने बताया बालू नाथ सजन नाथ और एक अन्य को गिरफ्तार किया है जबकि मुख्य आरोपी राजू कालबेलिया फरार है इनके कब्जे से अभी 6 लाख रुपये बरामद  किये गए हैं और शेष रकम राजू के पास हैं जिसकी तलाश की जा रही है जल्दी ही उसे पकड़ लिया जायेगा।  

Atul Saxena
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Neemuch News : एक मशहूर कहावत है… खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है लेकिन खरबूजे के बीज देख आदमी की नीयत तक बदल जाती है ऐसा सच में होते शायद ही देखा या सुना होगा। लेकिन ये सच है और ये हुआ है नीमच जिले में, मनासा पुलिस की तफ्तीश के बाद  23 लाख के गबन का मामला सामने आया है और पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जबकि चौथा फरार है।

कम्बल बेचने वालों ने किसान को लिया भरोसे में फिर किया धोखा 

दरअसल अशोकनगर जिले के चंदेरी के शंकरपुर गांव में मंदसौर जिले के गरोठ के कालबेलिया समाज के कुछ लोग कम्बल बेचने जाया करते थे उनकी यहाँ रहने वाले किसान राघवेंद्र यादव से पहचान हो गई। बातचीत के दौरान राघवेंद्र ने बताया कि उसके पास बड़ी मात्रा में खरबूजा बीज है जिसे उसे बेचना है।

131 क्विंटल खरबूजे का बीज बेचकर 23 लाख रुपये का गबन 

कुछ दिनों बाद कम्बल बेचने वाले तीन चार युवक फिर शंकरपुर पहुंचे, इन लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से किसान को फंसाया और उससे कहा कि नीमच जिले के रामपुरा में यह बीज 40 हजार रुपये क्विंटल तक बिक जाएंगे। किसान भी माल अच्छे दाम पर बेचना चाहता था इसलिए राजी हो गया और करीब 131 क्विंटल बीज भेज दिया।

ठगे किसान ने ली पुलिस की शरण

खरबूजे का बीज आते हैं चारों ने किसान को भनक तक नहीं लगने दी और मनासा और रामपुरा की मंडियों में बीज बेचा और 23 लाख रुपए से अधिक राशि लेकर फरार हो गए। किसान राह देखता ही रहा लेकिन उसे एक रुपया भी न मिला। जब उसे शक हुआ तो वह नीमच पुलिस के पास पहुंचा।

तीन आरोपी गिरफ्तार, थोड़ी रकम बरामद, चौथा फरार 

एसपी अंकित जायसवाल ने बताया बालू नाथ सजन नाथ और एक अन्य को गिरफ्तार किया है जबकि मुख्य आरोपी राजू कालबेलिया फरार है इनके कब्जे से अभी 6 लाख रुपये बरामद  किये गए हैं और शेष रकम राजू के पास हैं जिसकी तलाश की जा रही है जल्दी ही उसे पकड़ लिया जायेगा।

नीमच से कमलेश सारडा की रिपोर्ट


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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

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