उपचुनाव: आयोग ने कानून मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव, बढ़ सकती है प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की सीमा

वहीं इस मामले में राज्यसभा सांसद विवेक तंखा का कहना है कि कानून मंत्रालय को खर्च बढ़ाने के प्रस्ताव पर जल्द से जल्द निर्णय लेना चाहिए। ताकि प्रत्याशियों को उपचुनाव में इसका फायदा मिल सके।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश(madhya pradesh) विधानसभा उपचुनाव(by election) को लेकर निर्वाचन आयोग(Election Commission) प्रत्याशियों के चुनाव खर्च पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रत्याशियों के चुनावी खर्च को लेकर आयोग पहले ही एक निश्चित रकम की सीमा तय कर चुके हैं। जहां चुनावी खर्च के लिए प्रत्याशियों को 28 लाख रुपए की सीमा तय की गई है। वहीं चुनाव प्रचार और अभियान में इसके बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

दरअसल मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों के चुनावी खर्च में 2 लाख रुपए का इजाफा किया जा सकता है। इसके लिए आयोग ने कानून मंत्रालय(Law ministry) को खर्च सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। जिसके बाद विधानसभा प्रत्याशी पहले की तय रकम सीमा 28 लाख रुपए को बढ़ाकर 30 लाख रुपए तक चुनावी खर्च कर सकेंगे। उम्मीद की जा रही है कि 3 नवंबर को होने वाले मतदान से पूर्व कानून मंत्रालय द्वारा इसकी मंजूरी मिल जाएगी।

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वहीं इस मामले में राज्यसभा सांसद विवेक तंखा का कहना है कि कानून मंत्रालय को खर्च बढ़ाने के प्रस्ताव पर जल्द से जल्द निर्णय लेना चाहिए। ताकि प्रत्याशियों को उपचुनाव में इसका फायदा मिल सके। उन्होंने कहा कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए उपचुनाव में अधिक व्यय हो रहा है। बीजेपी का कहना है कि चुनावी कार्यक्रम में सामग्री उपयोग की जाती है। उसकी कीमत तय होनी चाहिए। कीमत ज्यादा होने से प्रत्याशियों पर चुनावी खर्च बढ़ता है।

बता दें कि उपचुनाव के लिए एक्सपेंडिचर मॉनिटरिंग मशीन द्वारा प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार की हर गतिविधि एवं खर्च पर नजर रखा जा रहा है। वहीं चुनाव आयोग ने कहा है कि 10 लाख रुपए से अधिक की नकदी चुनावी क्षेत्र में पकड़ी जाती है तो इस पर आयकर विभाग की भी कार्रवाई होगी।

कोरोना काल में उपचुनाव होने के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था के इंतजामों पर व्यय बढ़ने लगा है। सरकार के द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक चुनावी रैलियों करने में मास्क, सैनिटाइजर सहित अन्य सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है। इसके बाद प्रत्याशियों की मांग है कि चुनावी खर्च की सीमा को 40 लाख रुपए किया जाए किंतु चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को 30 लाख रूपए तक का प्रस्ताव भेजा है।

बता दे कि 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में चुनावी खर्च 180 करोड़ रुपए का बजट तथा वही हर सीट पर करीबन 78 लाख रुपए खर्च हुए थे जबकि कोरोना के संक्रमण काल में यह बजट अधिक हो गया है। हर सीट पर डेढ़ से ढाई करोड़ खर्च बढ़ गए हैं। अनुमान जताया गया है कि इस उपचुनाव में मध्यप्रदेश में 500 करोड़ से अधिक का खर्च सामने आएगा।

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