Daughter’s Day 2023: हर साल 24 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है बेटी दिवस? जानें इतिहास

Sanjucta Pandit
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Daughter’s Day 2023 : बेटियों को घर की लक्ष्मी और सुख का प्रतीक माना जाता है। उन्हें देवियों का दर्जा दिया गया है। देवी जी का स्वरूप बेटी, माँ, बहन और पत्नी के रूप में होता है। भारतीय पौराणिक कथाओं में देवी शक्ति का प्रतीक होती हैं। बेटियों से घर में चहल-पहल बनी रहती है। कहते हैं जिस घर में बेटियों का मान-आदर होता है उस घर में देवी-देवताओं की दृष्टि हर वक्त बनी रहती है। ऐसे परिवार को कभी किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होती है। इसी कड़ी में आज बेटी दिवस मनाया जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं इसे मनाने का उद्देश्य…

Daughter's Day 2023: हर साल 24 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है बेटी दिवस? जानें इतिहास

24 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है यह दिवस

बेटी दिवस के माध्यम से बेटियों के महत्व को समझाने और उनके अधिकारों का महत्वपूर्ण संदेश दुनियाभर में पहुंचाया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण दिन है जो समाज में लड़कियों और उनके भविष्य के लिए उत्साह प्रदान करता है। साल 2007 में इस दिन को पहली बार मनाया गया था। तब से लेकर आज तक हर साल 24 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस मनाया जाता है। इस दिन का दुनियाभर में सेमिनार, शिक्षा कार्यक्रम और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

बहुत सी बेटियां अपने अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं रखती हैं। जिसके परिणामस्वरूप वे समाज में अन्याय का शिकार हो जाती हैं। इसलिए जागरूकता के माध्यम से बेटियों को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षा दी जाती है। बेटी दिवस का आयोजन समाज में महिलाओं के साथ जेंडर न्यूट्रलिटी और समानता के सिद्धांतों को प्रमोट करने का भी माध्यम भी है।

जानें इतिहास

समाज में महिलाओं के स्थान का बदलाव समय के साथ हुआ है। बेटियों की स्थिति और महत्व का पुनर्निर्माण हो रहा है। हजारों साल पहले बेटियां समाज में मुख्य भूमिका में होती थीं और उन्हें गर्व के साथ परिवार और समाज में समर्थन दिया जाता था। पौराणिक कथाओं और इतिहास में भी बेटियों को देवियों के रूप में प्रदर्शित किया गया है। हालांकि, दिन-प्रतिदिन बदलते समय के साथ जातिवाद, दहेज प्रथा और महिलाओं के अधिकारों की कमी जैसे मुद्दे बेटियों के समाज में समान अधिकारों को लेकर अपवाद बढ़ने लगा। हालांकि, अब बेटियों के प्रति समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन आ चुका है।

पूरे घर की जान होती हैं बेटियाँ, दो कुलों का मान होती हैं बेटियाँ, बेटी से आबाद है घर-परिवार, मां-बाप की आन हैं बेटियां। आप सभी को हैप्पी डॉटर्स डे!


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मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं।

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