कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, जल्द हो सकते हैं नियमित, दिसंबर में अहम बैठक, जानें अपडेट

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Panjab University Employees Regularization : चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के ग्रुप सी और डी के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है।लंबे समय से चली आ रही है नियमितकरण की मांग पूरी हो सकती है। खबर है कि पंजाब यूनिवर्सिटी दस साल से अधिक समय से काम कर रहे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने की योजना बना रही है।इस संबंध में 4 दिसंबर को एक अहम बैठक रखी गई है।

दिसंबर में होगी अगली बैठक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब यूनिवर्सिटी के ग्रुप सी और डी के दस साल से अधिक सेवा देने वाले लगभग 400 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों (चपरासी, माली, सफाईकर्मी) को जल्द नियमित किया जा सकता है, इसको लेकर पिछले हफ्ते ही रजिस्ट्रार की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसमें पीयू की ओर से वर्ष 2017 में बनाई नियमित पॉलिसी पर हाइकोर्ट की ओर से स्टे लगने के कारणों इत्यादि पर चर्चा की गई और अब आगामी बैठक 4 दिसंबर को रखी गई है।
हालांकि इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नियमित करने से पहले वित्तीय स्थिति को देखा जाएगा, क्योंकि इसका असर पीयू के बजट पर पड़ेगा।

वित्तिय स्थिति को देखकर लिया जाएगा फैसला

इस बैठक में पीयूएनटीईएफ एसोसिएशन भी शामिल हुआ था, उनका कहना है कि लंबे समय से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सेवा नियमित करने को लेकर प्रयासरत है, जिसके बाद अब पीयू ने सकारात्मक रुख अपनाया है।वही पीयू के रजिस्ट्रार का कहना है कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने को लेकर बैठकें चल रही हैं। इसको लेकर संस्थान की वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा, इसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।बता दे कि इन कर्मचारियों में चपरासी, माली, सफाईकर्मी आदि शामिल हैं।


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Pooja Khodani

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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। "कलम भी हूँ और कलमकार भी हूँ। खबरों के छपने का आधार भी हूँ।। मैं इस व्यवस्था की भागीदार भी हूँ। इसे बदलने की एक तलबगार भी हूँ।। दिवानी ही नहीं हूँ, दिमागदार भी हूँ। झूठे पर प्रहार, सच्चे की यार भी हूं।।" (पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर)

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