Panna News: एक बाघिन के कुनबे से गुलजार हुआ अकोला बफर, बाघों का दीदार करने बड़ी संख्या में पहुंच रहे पर्यटक

पन्ना मध्यप्रदेश पर्यटन(Madhya Pradesh Tourism) को बढ़ावा देने तथा स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की मंशा से प्रदेश सरकार ने "बफर में सफर"(Buffer Mein Safar) को शुरु किया था। लेकिन, अब इस पहल ने पन्ना टाइगर रिजर्व(Panna Tiger Reserve) में धूम मचा रखी है।

पन्ना,भारत सिंह यादव। अकोला बफर(Akola Buffer) बाघिन पी-234 की वजह से गुलजार हो गया है। इस कारण  में बाघों का दीदार करने बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे है। साथ ही यहां नाइट सफारी भी शुरू हो गई, जिसके वजह से अकोला बफर का आकर्षण बढ़ गया है। पन्ना मध्यप्रदेश पर्यटन(Madhya Pradesh Tourism) को बढ़ावा देने तथा स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की मंशा से प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई “बफर में सफर”(Bafar Mein Safar) की अनूठी गतिविधि  पन्ना टाइगर रिजर्व(Panna Tiger Reserve) में धूम मचाए हुए है। पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला बफर में सुगमता के साथ पर्यटकों को बाघ दर्शन होने से यहां का आकर्षण बढ़ गया है।

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रोजगार का कारण बना अकोला बफर
अकोला बफर में भ्रमण करने व नाइट सफारी के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। यहां आने वाले पर्यटकों का अनुभव अत्यधिक रोमांचक रहता है, क्योंकि वे यहां पर बाघ दर्शन के साथ-साथ रात के सन्नाटे में जंगल की निराली दुनिया का भी पूरा लुत्फ उठा पाते हैं। पर्यटन शुरू होने से आसपास स्थित ग्रामों के लोग भी प्रसन्न और उत्साहित हैं, क्योंकि गांव के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवक गाइड बनकर कमाई कर रहे है।

रोमांच से भरा होगा सफर
उल्लेखनीय है कि पन्ना – अमानगंज मुख्य मार्ग पर पन्ना से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर अकोला बफर का प्रवेश द्वार है। यहीं से पर्यटक बफर में सफर का लुफ्त उठाने और वनराज का दीदार करने के लिए प्रवेश करते हैं। अकोला गेट के निकट ही टिकट काउंटर है। जहां से पर्यटक टिकट लेकर बफर के सफर में जा सकते हैं। महज 12 सौ रुपए की टिकट पर 6 पर्यटक जिप्सी अथवा निजी वाहन से अकोला बफर के रोमांचकारी सफर में निकल कर लेंटाना की झाड़ियों के नीचे आराम फरमाते वनराज व नन्हे बच्चों को अठखेलियां करते हुए देख सकते हैं।

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यहां आने वाले ज्यादातर पर्यटकों को बाघ के दर्शन का अवसर मिल ही जाता है। इसके वजह से पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र की तरह ही अब अकोला बफर में भी जिप्सी वाहनों की कतार लगने लगी रहती है। बफर में सफर योजना की कामयाबी तथा पर्यटकों के बढ़ते रुझान को देख पार्क प्रबंधन अकोला बफर की तर्ज पर बफर क्षेत्र के अन्य दूसरे इलाकों को भी विकसित और संरक्षित करने की रणनीति बना रहा है। जिससे कोर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे बाघों के कुनबे को इन इलाकों में अनुकूल आश्रय मिल सके।

अकोला बफर को पी-234 ने किया गुलजार

पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला बफर का आकर्षण बाघिन पी-234 तथा उसका भरा-पूरा कुनबा है। पन्ना टाइगर रिजर्व की संस्थापक बाघिन टी-2 जिसे मार्च 2009 में कान्हा से पन्ना लाया गया था, इस बाघिन ने जुलाई 2013 में चार शावकों को जन्म दिया था। इन्हीं शावकों में से एक बाघिन पी-234 है जिसके कुनबे ने अकोला बफर को गुलजार किया हुआ है। इस बाघिन ने नर बाघ टी-7 के साथ मिलकर अपने कुनबे को बढ़ाया है। इसी बाघिन की बेटी पी-234 (23) ने अकोला बफर क्षेत्र में ही तीन शावकों को जन्म दिया है, जो 3 माह के हो चुके हैं और अपनी मां के साथ जंगल में विचरण कर शिकार करने के गुर सीखने लगे हैं, ये नन्हें शावक भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। इन शावकों को अठखेलियां करते हुए देखने का सौभाग्य जिन पर्यटकों को मिल जाता है, वे खुशी से झूम उठते हैं।

नाइट सफारी में पर्यटकों ने देखा बाघ
अकोला बफर में बीते 5 मार्च शुक्रवार को भी पर्यटकों ने नाइट सफारी में शाम 7 बजे के लगभग बाघिन पी-234 के युवा नर शावक को बेहद करीब से झाड़ी के नीचे आराम फरमाते हुए देखा। संयोग से शुक्रवार को मैं भी नाइट सफारी पर था और उसी मार्ग से गुजर रहा था मार्ग पर दो जिप्सियां व एक निगरानी दल की गाड़ी खड़ी थी। जिससे यह प्रतीत हो रहा था कि जरूर यहां पर कुछ है आगे बढऩे पर वयस्क बाघ की कद काठी वाले एक नर शावक को झाड़ी के नीचे बैठे देखा। तो, मन प्रफुल्लित हो गया वाहनों की रोशनी पड़ने पर यह बाघ शावक पूरे राजसी अंदाज में आहिस्ते से उठा और मार्ग पर खड़े वाहनों पर नजर डालते हुए जंगल में चला गया।

बाघों का दर्शन करने दूर-दूर से आते है लोग
वहीं आसपास इस शावक के भाई व मां की मौजूदगी के भी संकेत मिले। सड़क मार्ग पर भी यहाँ से बाघ दिख जाते हैं। पन्ना-अमानगंज सड़क मार्ग से चंद कदमों की दूरी पर आराम फरमाता बाघ वनराज की एक झलक पाने के लिए लोग सैकड़ों किलोमीटर दूर यहां आते हैं। साथ ही इसके लिए हजारों रुपए भी खर्च करते हैं। लेकिन, पन्ना जिले के लोगों का यह शौभाग्य है कि उन्हें सड़क मार्ग पर ही चहल कदमी करते वनराज के दीदार हो जाते हैं। अमानगंज मार्ग पर अक्सर इस तरह के नजारे देखने को मिलते हैं। कई बार तो वनराज सड़क किनारे ही बैठ कर आराम फरमाते नजर आते हैं।

फलस्वरूप इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन ठहर जाते हैं और लोग इस दुर्लभ नजारे को न सिर्फ देखते हैं बल्कि कैमरे में भी कैद करते हैं। बीते रोज नर बाघ पी-111 इसी तरह सड़क मार्ग से कुछ मीटर की दूरी पर काफी देर तक विश्राम करता रहा, जिसे सड़क मार्ग के दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई बड़ी देर तक यात्रियों ने इस दिलकश व रोमांचकारी दृश्य को देखा और वाहन में बैठे-बैठे बाघ की तस्वीर भी खींची। यदि आपने अभी तक वनराज के दर्शन नहीं किये और चाहते हैं कि यह रोमांचकारी अनुभव आप भी करें, तो फिर देरी किस बात की आप नाइट सफारी पर अकोला बफर के सफर पर जायें हो सकता है आपकी यह अभिलाषा यहां पूरी हो जाये