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रतलाम राशन घोटाला : फूड ऑफिसर जांगड़े इंदौर से गिरफ्तार, अब EOW करेगा मामले की जांच

रतलाम।

मध्यप्रदेश के रतलाम में हुए राशन घोटाले को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने इस मामले में फरार चल रहे जिला आपूर्ति अधिकारी को इंदौर से गिरफ्तार किया है। पूछताछ के लिए पुलिस जैसे ही उन्हें रतलाम लेकर पहुंची वैसे ही उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें आनन-फानन में जिला अस्पताल में भर्ती करवाया।तबीयत खराब होने के चलते शुक्रवार को उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति एस.सी. शर्मा ने उन्हें एक लाख रुपए जमानत-मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, साल 2016  में रतलाम जिले में  करीब 9 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया था, जिसमें जनवरी 2018 में जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी आर.सी.जांगडे सहित 8 राशन दुकान संचालकों पर मामला दर्ज किया गया था।इसके बाद से ही पुलिस खाद्य अधिकारी जांगडे की तलाश कर रही थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि वे इंदौर में छिपे है। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें इंदौर से गिरफ्तार कर लिया।पूछताछ में सहयोग नहीं करने पर पुलिस उन्हें रतलाम लाई, जहां उन्होंने शुगर और ब्लडप्रेशर बढ़ने के कारण तबीयत बिगड़ने की शिकायत की। पुलिस जांगड़े को जिला अस्पताल ले गई, जहां उसे सीसीयू में भर्ती कराया गया। शुक्रवार को उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति एस.सी. शर्मा ने उन्हें एक लाख रुपए जमानत-मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। 

ये है आरोप

जांगड़े पर आरोप है कि उन्होंने ही नगर निगम कि मजदूर डायरियों मे हजारों फर्जी नाम जोड़कर इन लोगों ने करोड़ों रुपए के राशन कि कालाबाजारी की है।इस मामले में तत्कालीन कलेक्टर बी.चंद्रशेखर ने इस महाघोटाले का खुलासा किया था, जिसमे जांच के बाद अब कलेक्टर तन्वी सुंद्रीयाल के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है।

अब EOW  करेगा जांच

वही अब इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान) को सौंपी जाएगी। शहर की 63 राशन दुकानों में से ईओडब्ल्यू द्वारा शुरुआत में 9 दुकानों की जांच की जाएगी। सभी 63 दुकानों की जांच हुई तो घोटाले की राशि 80 करोड़ से अधिक होने की संभावना है। इसके साथ ही अब पुलिस ने उन लोगों पर कार्रवाई शुरु कर दी है, जिन्होंने नगर निगम की मजदूर डायरियों मे अपना नाम फर्जी तरीके से जोड़कर करोड़ों रुपए गबन किए और सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया।अब खुलासे के बाद 23 हजार फर्जी परिवारों के नाम राशन लेने वालों की लिस्ट से काटे जाएंगे। 

बता दे कि इस बहुचर्चित घोटाले का खुलासा तात्कालिक कलेक्टर बी.चंद्रशेखर ने 2016 में किया था।उन्हें इस मामले में जनसुनवाई मे लगातार शिकायते मिल रही थी, जिसके बाद उन्होंने रिकार्ड खंगाला तो पूरा घोटाला सामने आ गया। सरकारी दुकानों से राशन लेने वालों को जब आधार कार्ड को ट्रिपल एसएमआई से जोड़ा गया। थंब इम्प्रैशन से दुकानों पर अनाज दिया जाने लगा, तो फर्जी राशन वाले दुकानों तक पहुंचे ही नहीं। जिसके बाद इस  राशन घोटाले की असलियत सामने आई।

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