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भू-वैज्ञानिक डॉ. सोनकिया की सड़क हादसे में मौत, 5 लाख साल पुराने 'नर्मदा मानव' की थी खोज

भोपाल/होशंगाबाद।

देश के प्रख्यात भू वैज्ञानिक डॉ. अरुण सोनकिया की शनिवार को एक सड़क हादसे में मौत हो गई ।अरुण सोनकिया पांच लाख साल पुराने 'नर्मदा मानव' की खोज करने वाले पहले  वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक थे।उन्होंने ही 5 दिसंबर  1982 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के एक अध्ययन दल के साथ मिलकर मप्र के सीहोर जिले के हथनौरा गांव में पांच लाख साल पुरानी मानव खोपड़ी की खोज की थी।जिसे 'नर्मदा मानव" नाम दिया गया था। इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था।

जानकारी के अनुसार,  डॉ. सोनकिया (61) शनिवार को दोपहर 12 बजे मारूति कार (एमएच 31 एजी 8961 )से अपने पैतृक गांव हिरणखेड़ा से अपने बेटे से मिलने भोपाल जा रहे थे, तभी होशंगाबाद स्थित टोल नाके के करीब सामने से आ रहे ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी।घटना में वे कार में दब चुके थे, उन्हें राहगीरों ने बाहर निकाला, लेकिन जब तक इमरजेंसी 108 पहुंचती उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना स्थल पर देहात थाने की बीट और डायल 100 भी पहुंची। 

बताया जा रहा है कि टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे तक उड़ गए। वही ट्रक का ड्राइवर घटना के बाद से फरार है, लेकिन क्लीनर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। बताया जा रहा है कि ड्राइविंग सीट पर बैठे सोनकिया इस बुरी तरह फंसे थे कि पुलिस और ग्रामीणों को शव निकालने में एक घंटे से ज्यादा समय तक मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले में जांच की जा रही है। वही पीएम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया गया है। 

गौरतलब है कि डॉक्टर सोनकिया की यह खोज नर्मदा घाटी में पांच लाख साल पहले से मानव सभ्यता का पहला सबूत थी। उनकी इस खोज ने नर्मदा घाटी और उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई थी।  इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति सम्मान से नवाजा गया था। थे । इस प्राचीन मानव को वैज्ञानिकों द्वारा नर्मदा मानव का नाम दिया गया। इस कंकाल का आकलन ईएसआर (इलेक्ट्रॉन स्पीन रेजोलेंस) डेटिंग पद्धति से किया था। इससे यह साबित किया गया कि मानव के विकास की कहानी भारत में शुरू होती है। इससे पूर्व आदि मानव की उत्पत्ति की जानकारी पूर्वी अफ्रीका के तंजानिया अंतर्गत ओल्डवाईगॉज नामक स्थान से मिलती रही है। नर्मदा मानव की 5 लाख साल पुरानी खोपड़ी आज भी मानव विज्ञान संग्रहालय नागपुर में देखी जा सकती है। इसे धरोहर स्वरूप रख गया है। हथनोरा के सामने के ग्राम धांसी और सूरजकुंड में नर्मदा के उत्तरी तट पर प्राचीनतम विलुप्त हाथी (स्टेगोडॉन) के दोनों दांत तथा ऊपरी जबड़े का जीवाश्म भी उन्होंने खोजा था।  नर्मदा घाटी में मिली यह लाखों साल पुरानी मानव खोपड़ी अब कोलकाता के एक संग्रहालय में रखी हुई है।


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